संसदीय समिति के सामने छात्र का महाप्रजेंटेशन : CBSE की टेंडर प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल
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शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग को लेकर 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने एक बड़ी लकीर खींच दी है। मंगलवार को संसद भवन एनेक्सी में शिक्षा मामलों की संसदीय समिति के सामने सार्थक ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम और टेंडर प्रक्रिया में कथित धांधली को लेकर जो प्रजेंटेशन दिया, उसने सबको चौंका दिया।

सार्थक के प्रजेंटेशन से हिला CBSE लगभग 3 घंटे तक चली इस बैठक में CBSE के अधिकारी भी उस वक्त हैरान रह गए जब सार्थक ने सिलसिलेवार तरीके से टेंडर प्रक्रिया की खामियां सामने रखीं। सार्थक ने सवाल उठाया कि Request for Proposal (RFP) जारी होने के बाद उसमें अचानक फेरबदल क्यों किए गए?

टेंडर और कंपनी की साख पर बड़े सवाल सार्थक ने COEMPT कंपनी की बैलेंस शीट, RFP में शर्तों को बदलने और कंपनी के पुराने नाम ग्लोबएरेना के तेलंगाना शिक्षा बोर्ड के साथ काम करने के दौरान की विवादित पृष्ठभूमि जैसे तीखे मुद्दों पर अपना पक्ष रखा। समिति के सदस्य सार्थक के रिसर्च और स्पष्टता को देखकर काफी प्रभावित दिखे। सूत्रों की मानें तो उनकी प्रस्तुति के दौरान कई सांसदों ने मेज थपथपाकर उनका समर्थन भी किया।

सीधे तौर पर पूछा: कौन है जिम्मेदार? समिति ने CBSE के अधिकारियों से कड़ा रुख अपनाते हुए पूछा कि इन अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार कौन है और अब तक क्या कार्रवाई की गई है? समिति के सदस्यों ने तंज कसते हुए कहा कि जिस तरह का रिसर्च इस छात्र ने किया है, उसे तो CBSE को अपना सलाहकार बना लेना चाहिए। इस पर सीबीएसई के आला अधिकारी चुप्पी साधे रहे।

छात्र हित ही सर्वोपरि: दिग्विजय सिंह बैठक की अध्यक्षता कर रहे कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने साफ कहा कि यह समिति छात्रों के भविष्य को लेकर बेहद गंभीर है और जो कुछ भी होगा, वह उनके हित में ही होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्थक द्वारा उठाए गए सवालों का विस्तृत जवाब CBSE को अगली बैठक में देना होगा।

दिग्गज नेताओं की मौजूदगी इस महत्वपूर्ण बैठक में दिग्विजय सिंह के अलावा रविशंकर प्रसाद, संबित पात्रा और जिया उर रहमान बर्क जैसे वरिष्ठ सांसद मौजूद थे। इनके साथ शिक्षा सचिव और सीबीएसई चेयरमैन भी उपस्थित थे। अब सभी की निगाहें अगली बैठक पर टिकी हैं, जहां CBSE को इन गंभीर आरोपों का जवाब देना है।

क्या यह प्रजेंटेशन भविष्य में सरकारी टेंडर प्रक्रियाओं में बड़े सुधारों का आधार बनेगा? फिलहाल, सार्थक की इस पहल ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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