140 साल का वनवास खत्म: धार में बनेगा मां सरस्वती लोक , लंदन से वाग्देवी को वापस लाने की कवायद तेज
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धार की ऐतिहासिक भोजशाला अब एक नए युग में प्रवेश कर रही है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार में उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर अलौकिक मां सरस्वती लोक के निर्माण की घोषणा की है। साथ ही, राजा भोज के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को पुनर्जीवित करने के लिए राजा भोज रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना की जाएगी।

न्याय की जीत: भोजशाला अब मां सरस्वती का मंदिर

15 मई 2026 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक युगांतकारी निर्णय सुनाया। अदालत ने पुरातात्विक साक्ष्यों और वैज्ञानिक तथ्यों को आधार मानते हुए भोजशाला परिसर को स्पष्ट रूप से मां सरस्वती को समर्पित हिंदू मंदिर घोषित किया है। वर्षों से चली आ रही सीमित पूजा की व्यवस्था को चुनौती देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मंदिर की मौलिक पहचान को विभाजित नहीं किया जा सकता।

क्या है वाग्देवी का इतिहास?

11वीं शताब्दी में राजा भोज ने धार को शिक्षा का वैश्विक केंद्र बनाया था। उन्होंने वहां सरस्वती सदन (भोजशाला) स्थापित किया, जिसके मध्य में सफेद संगमरमर से बनी, 250 किलो वजनी और 4 फीट ऊंची मां वाग्देवी की प्रतिमा प्रतिष्ठित की गई थी। 1305 में खिलजी के आक्रमण के बाद यह प्रतिमा लुप्त हो गई थी। 1875 में खुदाई के दौरान यह प्रतिमा मिली, लेकिन ब्रिटिश शासनकाल में मेजर किनकेड इसे चालाकी से लंदन ले गए। आज यह प्रतिमा पिछले 140 वर्षों से ब्रिटिश म्यूजियम में कैद है।

घर वापसी की मांग और सांस्कृतिक संघर्ष

1961 में प्रसिद्ध पुरातत्वविद डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर ने लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में इस मूर्ति की पहचान वाग्देवी के रूप में की थी। अब, जब भोजशाला को आधिकारिक रूप से मंदिर का दर्जा मिल गया है, तो देश भर में वाग्देवी की घर वापसी की मांग तीव्र हो गई है। माना जा रहा है कि भारत सरकार जल्द ही कूटनीतिक स्तर पर ब्रिटेन से इस प्रतिमा को ससम्मान वापस लाने का दावा पेश करेगी।

कैसा होगा मां सरस्वती लोक ?

यह प्रस्तावित लोक केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि प्राचीन भारत के ज्ञान-विज्ञान का आधुनिक केंद्र होगा। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार होंगी:

धार की यह धरती, जो कभी राजा भोज की ज्ञान-साधना का केंद्र थी, अब एक बार फिर अपने पुराने वैभव को पाने की ओर अग्रसर है। मां सरस्वती लोक का निर्माण और वाग्देवी की संभावित घर वापसी मात्र एक विकास कार्य नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों के लिए एक ऐतिहासिक गौरव की पुनर्स्थापना होगी।

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