मिन आंग ह्लाइंग का भारत दौरा: क्या म्यांमार के रास्ते चीन को घेरने की तैयारी में दिल्ली?
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म्यांमार के सैन्य शासक से राष्ट्रपति बने मिन आंग ह्लाइंग ने पदभार संभालने के दो महीने से भी कम समय में अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत को चुना है। शनिवार को पांच दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे ह्लाइंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। यह यात्रा म्यांमार के बदलते कूटनीतिक रुख और भारत के रणनीतिक हितों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

क्षेत्रीय संबंधों में वापसी की कोशिश पांच साल पहले तख्तापलट के बाद से ही म्यांमार का सैन्य नेतृत्व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ गया था। विश्लेषकों का मानना है कि नागरिक राष्ट्रपति का चोला ओढ़ने के बाद ह्लाइंग अब अपनी खोई हुई साख बहाल करना चाहते हैं। वे थाईलैंड और आसियान देशों के साथ भी संबंध सुधारने की कवायद में हैं। ह्लाइंग की यह यात्रा दिखाती है कि वे अपनी कूटनीतिक अलगाव की स्थिति को खत्म करना चाहते हैं।

भारत और चीन का संतुलन म्यांमार के पूर्व राजदूत गौतम मुखोपाध्याय के अनुसार, ह्लाइंग का भारत आना चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की एक सोची-समझी चाल है। म्यांमार लंबे समय से बीजिंग के आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव में रहा है। अब ह्लाइंग भारत के साथ मिलकर एक संतुलित कूटनीति अपनाना चाहते हैं, ताकि वे केवल चीन पर निर्भर न रहें।

रेयर अर्थ मिनरल्स और सामरिक हित भारत के लिए यह दौरा व्यापारिक और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। म्यांमार में मौजूद रेयर अर्थ मिनरल्स (Rare Earth Minerals) के भंडार पर भारत की नजर है, जो भविष्य की तकनीक के लिए अनिवार्य हैं। साथ ही, पूर्वोत्तर भारत की सीमाओं पर सक्रिय विद्रोही समूहों और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए म्यांमार का सहयोग भारत की पहली प्राथमिकता है।

सीमा पार सुरक्षा और चुनौतियां वर्तमान में म्यांमार की सेना भारतीय सीमा से सटे चिन और रखाइन राज्यों में विद्रोही समूहों के खिलाफ आक्रामक अभियान चला रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ह्लाइंग अपनी यात्रा के दौरान भारत से इन विद्रोही समूहों के खिलाफ अधिक सहयोग मांग सकते हैं। वहीं, भारत इस अवसर का उपयोग अपने उन महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित करने के लिए करना चाहेगा जो इस क्षेत्र से होकर गुजरते हैं।

निष्कर्ष भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा को संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा का अवसर बताया है। भले ही म्यांमार के सैन्य शासन को लेकर वैश्विक स्तर पर सवाल उठते रहे हों, लेकिन भारत का रुख रणनीतिक और व्यावहारिक नजर आ रहा है। ह्लाइंग की यह यात्रा चीन के दबदबे को कम करने और पड़ोसी देश में भारत के प्रभाव को मजबूत करने की एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा है।

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