पुणे में दरिंदगी: दुकान में घुसकर गर्लफ्रेंड को बेरहमी से पीटा, वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप
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पुणे के पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी इलाके से एक बेहद विचलित कर देने वाला सीसीटीवी फुटेज सामने आया है। इस वीडियो में एक शख्स अपनी गर्लफ्रेंड के साथ ऐसी दरिंदगी करता दिख रहा है, जिसे देखकर किसी की भी रूह कांप जाए। 27 मई, 2026 की शाम करीब 4:47 बजे हुई इस घटना ने कानून और समाज की संवेदनशीलता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

चार मिनट तक चली बर्बरता फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि आरोपी युवक किसी बात के शक में कपड़ों की दुकान में घुसता है। वह बिना किसी हिचकिचाहट के लड़की का गला पकड़ता है और उसे लात-घूंसों से पीटने लगता है। जब लड़की रोने लगती है, तो आरोपी उसके बाल पकड़कर उसे जमीन पर घसीटता है।

इस पूरी वारदात के दौरान दुकान में मौजूद एक बच्चा डर के मारे काउंटर के नीचे छिप जाता है, जिसे आरोपी डराता-धमकाता भी नजर आता है। हैरान करने वाली बात यह है कि करीब चार मिनट तक यह मारपीट चलती रही, लेकिन किसी ने भी उसे रोकने की हिम्मत नहीं जुटाई।

माफी का नाटक और पुलिस की बेबसी मारपीट खत्म होने के बाद, आरोपी ने लड़की के पैर पकड़कर माफी मांगने का नाटक किया। जब यह वीडियो ऑनलाइन वायरल हुआ और पुलिस हरकत में आई, तो पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराने से साफ इनकार कर दिया। उसने इसे अपना निजी मामला करार दिया।

कानूनी पेंच यह है कि पीड़िता की शिकायत न होने के कारण पुलिस के पास आरोपी को गिरफ्तार करने का कोई ठोस आधार नहीं बचा है। इस वजह से न तो कोई एफआईआर दर्ज हुई और न ही आरोपी सलाखों के पीछे है।

खामोश समाज और सोशल मीडिया का गुस्सा इस घटना ने स्थानीय लोगों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। व्यस्त दुकान में चार मिनट तक हिंसा होती रही, लेकिन दुकान मालिकों या वहां मौजूद किसी भी व्यक्ति ने पुलिस को फोन करने की जहमत नहीं उठाई।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वीडियो सामने आने के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। जहां कुछ लोग आरोपी के लिए कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग पीड़िता की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं। कई यूजर पूछ रहे हैं कि ऐसी हिंसा के बावजूद पीड़िता ने विरोध क्यों नहीं किया।

देशभर में बढ़ते अपराध के आंकड़े यह घटना देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों की एक छोटी सी तस्वीर मात्र है। आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश (66,381), महाराष्ट्र (47,101), राजस्थान (45,450), पश्चिम बंगाल (34,691) और मध्य प्रदेश (32,342) में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामले सबसे अधिक हैं। ऐसे मामलों में अक्सर निजी मामला कहकर चुप्पी साध लेना समाज और कानून के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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