भारतीय कृषि निर्यात के लिए एक कठिन दौर शुरू हो गया है। एक तरफ जापान ने भारतीय आमों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है, तो दूसरी तरफ चीन लगातार भारतीय चावल की खेपों को खारिज कर रहा है। यह स्थिति भारतीय किसानों और निर्यातकों के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।
जापान ने अप्रैल-जून सीजन के लिए भारतीय आमों के निर्यात पर रोक लगा दी है। इसमें अल्फांसो, केसर और लंगड़ा जैसी लोकप्रिय किस्में शामिल हैं। जापान का तर्क है कि भारत के वेपर हीट ट्रीटमेंट (VHT) केंद्रों पर सफाई और फ्यूमिगेशन में तकनीकी खामियां हैं।
जापान अपनी क्वारंटीन टीम के जरिए हर साल आमों की जांच करता है। 20 साल पहले भी जापान ने इसी तरह का प्रतिबंध लगाया था, जो दो दशकों तक चला था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार मानकों का हवाला देकर व्यापार को बाधित किया गया है।
आम के बाद अब चावल पर चीन का रुख चिंताजनक है। ड्रैगन ने भारतीय नॉन-बासमती चावल की खेपों को लगभग 70 बार रिजेक्ट किया है। चीन का दावा है कि इन चावलों में जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म (GMO) मौजूद हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेजल कमेटी (GEAC) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। स्पष्ट है कि भारत में कपास के अलावा किसी भी जीएम फसल की व्यावसायिक खेती की अनुमति ही नहीं है।
जानकारों का कहना है कि चीन का यह कदम महज गुणवत्ता जांच नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक धमक को रोकने की साजिश है। हाल ही में भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पछाड़कर दुनिया का नंबर एक देश होने का खिताब हासिल किया है।
चीन खुद जीएम चावल का बड़ा उत्पादन करता है। भारतीय चावल की बढ़ती मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसकी प्रतिस्पर्धा को देखते हुए बीजिंग जानबूझकर हमारी छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहा है। वह बार-बार खेपें लौटाकर वैश्विक स्तर पर भारतीय चावल की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करना चाहता है।
भले ही जापान भारतीय आमों का कोई बहुत बड़ा बाजार नहीं है, लेकिन इस प्रतिबंध से वैश्विक स्तर पर भारतीय कृषि उत्पादों की क्वालिटी पर नकारात्मक संदेश जाता है। वहीं, चावल के मामले में भारत की स्थिति मजबूत है।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 172 से अधिक देशों को 2.01 करोड़ टन चावल का निर्यात किया है। भारत का कुल चावल उत्पादन 150.18 मिलियन मीट्रिक टन है। चीनी बाधाओं के बावजूद, भारतीय चावल की गुणवत्ता और मांग पूरी दुनिया में बनी हुई है। भारत सरकार अब इस तकनीकी विवाद को सुलझाने के लिए कूटनीतिक और वैज्ञानिक स्तर पर चर्चा की तैयारी कर रही है।
Guys, #indianmango fever has landed in Singapore. Mangoes from all states of India are flying off the shelves. Thanks to @protosphinx for sharing the story with us. HC Wong#mango #mangoexport @AgriGoI #fruit pic.twitter.com/vQWkjR5jN4
— Singapore in India (@SGinIndia) May 25, 2026
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