विनेश फोगाट की जीत: क्या है WFI के साथ विवाद और सुप्रीम कोर्ट ने कैसे सुलझाया मामला?
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भारतीय कुश्ती की स्टार पहलवान विनेश फोगाट एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह कोई मेडल नहीं, बल्कि भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के साथ उनका कानूनी संघर्ष है। माँ बनने के बाद अखाड़े में वापसी कर रहीं विनेश के लिए महासंघ ने राहें मुश्किल कर दी थीं, जिसे अंततः सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया।

विवाद की शुरुआत: महासंघ ने क्यों लगाई रोक? विनेश फोगाट ने 1 जुलाई 2025 को अपने बेटे को जन्म दिया था। माँ बनने के लगभग 10 महीने बाद जब उन्होंने वापसी की कोशिश की, तो WFI ने उन्हें घरेलू टूर्नामेंट खेलने से अयोग्य घोषित कर दिया।

महासंघ ने तर्क दिया कि संन्यास के बाद वापसी करने वाले खिलाड़ियों को एंटी-डोपिंग नियमों के तहत 6 महीने पहले नोटिस देना अनिवार्य है। साथ ही, नए नियमों का हवाला देते हुए कहा गया कि ट्रायल्स में भाग लेने के लिए 2025 या 2026 में कोई पदक जीतना जरूरी है। महासंघ ने विनेश को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था, जिसमें पेरिस ओलंपिक में वजन अधिक होने के कारण मिली अयोग्यता को देश के लिए शर्मनाक बताया गया था।

दिल्ली हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला WFI द्वारा रोके जाने के बाद विनेश ने दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया। 22 मई को कोर्ट ने विनेश के पक्ष में फैसला सुनाते हुए महासंघ को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने साफ कहा कि माँ बनना किसी महिला एथलीट के करियर में रुकावट नहीं बन सकता । पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट ने ट्रायल्स की वीडियो रिकॉर्डिंग और SAI-IOA के स्वतंत्र ऑब्जर्वर्स की मौजूदगी अनिवार्य कर दी।

सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला हाई कोर्ट के फैसले के बाद WFI इसे चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुनवायी के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विनेश से कहा कि वे एक उत्कृष्ट खिलाड़ी हैं, लेकिन देश हमेशा सर्वोपरि है । न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा ने स्पष्ट किया कि अदालतें खेल आयोजनों और उनके कार्यक्रमों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहतीं।

हालांकि, अंततः सुप्रीम कोर्ट ने भी विनेश को बड़ी राहत देते हुए उन्हें 2026 एशियाई खेलों के ट्रायल्स में हिस्सा लेने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने इस मामले को खेल की गरिमा और एथलीट के अधिकारों के संतुलन के रूप में देखा।

विनेश का संघर्ष और उपलब्धियां विनेश फोगाट का भारतीय कुश्ती महासंघ के साथ विवाद पुराना है। जनवरी 2023 में वे जंतर-मंतर पर महिला पहलवानों के यौन शोषण के खिलाफ हुए प्रदर्शन का मुख्य चेहरा थीं, जिसके बाद तत्कालीन अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को इस्तीफा देना पड़ा था।

विनेश भारत की सबसे सफल पहलवानों में गिनी जाती हैं। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल की हैट्रिक लगाई है, एशियन गेम्स में पदक जीते हैं और वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी भारत का मान बढ़ाया है। वे ओलंपिक फाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान भी बनी थीं, हालांकि पेरिस ओलंपिक में 100 ग्राम वजन अधिक होने के कारण उन्हें डिस्क्वालिफाई कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट से मिली इस अनुमति के बाद अब विनेश फोगाट की नजरें 2026 एशियाई खेलों पर हैं, जहाँ वे एक बार फिर देश के लिए पदक जीतने के लिए तैयार हैं।

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