ट्विशा शर्मा केस: एम्स दिल्ली में दोबारा पोस्टमार्टम की मांग, पोस्टमार्टम रिपोर्ट की विसंगतियों पर खड़े हुए गंभीर सवाल
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भोपाल की 33 वर्षीय मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। परिवार ने भोपाल एम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष जांच के लिए दिल्ली एम्स में दोबारा पोस्टमार्टम की मांग की है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गंभीर चूक का आरोप

मृतका के परिवार के वकील अंकुर पांडे ने रिपोर्ट में बड़ी विसंगतियों का दावा किया है। उन्होंने बताया कि ट्विशा की लंबाई लगभग 172-173 सेंटीमीटर (करीब 5.7 फीट) थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसे केवल 161 सेंटीमीटर दर्ज किया गया है। वकील का कहना है कि शव की पहचान और बुनियादी शारीरिक जानकारी में इतनी बड़ी गलती जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करती है।

जांच प्रभावित करने का आरोप

अधिवक्ता अंकुर पांडे ने जांच एजेंसियों पर मामले में लापरवाही बरतने और साक्ष्यों को प्रभावित करने का प्रयास करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भोपाल एम्स में प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। वकील का दावा है कि परिवार पर जल्द अंतिम संस्कार करने का दबाव बनाया जा रहा है, ताकि मामले की सच्चाई दफन हो सके।

शव की बिगड़ती स्थिति और दिल्ली एम्स की मांग

परिवार का कहना है कि भोपाल एम्स के पास लंबे समय तक शव को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं, जिससे शव की स्थिति खराब हो रही है। इसी आधार पर वे दिल्ली एम्स में दोबारा पोस्टमार्टम करवाना चाहते हैं, ताकि मौत के वास्तविक कारणों—विशेषकर शरीर पर मौजूद चोटों—की वैज्ञानिक पुष्टि हो सके।

राष्ट्रीय महिला आयोग सख्त

इस मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। आयोग ने राज्य सरकार से सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट (ATR) तलब की है।

अदालत का रुख और पुलिस की सफाई

परिवार की मांग के बाद मामला अदालत पहुंच गया है। पुलिस ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि उन्हें दोबारा पोस्टमार्टम कराए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। दूसरी ओर, पुलिस ने परिवार को पत्र लिखकर शव को जल्द से जल्द ले जाने को कहा है, ताकि डीकंपोजिशन (शव के गलने) की प्रक्रिया को रोका जा सके। फिलहाल, पूरे मामले की दिशा अदालत के अगले फैसले पर टिकी है।

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