नई दिल्ली: भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण में, 11वीं शताब्दी के चोल काल के दुर्लभ ताम्र-पत्र (Copper Plates) स्वदेश लौट आए हैं। नीदरलैंड के साथ राजनयिक प्रयासों के बाद, इन प्राचीन अभिलेखों को आधिकारिक रूप से भारत को सौंप दिया गया है।
क्या हैं ये लीडेन प्लेट्स ? यूरोप में लीडेन प्लेट्स के नाम से प्रसिद्ध ये कलाकृतियां चोल साम्राज्य के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेजों में गिनी जाती हैं। 21 बड़ी और 3 छोटी प्लेटों वाले इस सेट का कुल वजन लगभग 30 किलोग्राम है। ये एक ब्रॉन्ज की अंगूठी से जुड़ी हैं, जिस पर चोल राजसी मुहर लगी है।
इतिहास के पन्नों से जुड़ा महत्व ये ताम्र-पत्र महान सम्राट राजेंद्र चोल प्रथम के शासनकाल से संबंधित हैं। इन पर अंकित लेख संस्कृत और तमिल भाषा में हैं। ये मुख्य रूप से राजा राजराजा प्रथम द्वारा किए गए एक मौखिक वादे को औपचारिक रूप देने का साक्ष्य हैं। 19वीं सदी के मध्य से ये नीदरलैंड की लीडेन यूनिवर्सिटी में संरक्षित थे।
12 साल लंबा चला संघर्ष भारत सरकार लंबे समय से अपनी इस खोई हुई धरोहर को वापस लाने का प्रयास कर रही थी। इसके लिए वर्ष 2012 से ही आधिकारिक मांग की जा रही थी। अंततः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड यात्रा के दौरान, वहां के प्रधानमंत्री रॉब जेटेन की मौजूदगी में औपचारिक रूप से इनकी वापसी सुनिश्चित हुई।
पीएम मोदी ने जताई खुशी प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर इस उपलब्धि को हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया। उन्होंने कहा, हम भारतीयों को चोलों की संस्कृति और उनकी समुद्री शक्ति पर बेहद गर्व है। मैं लीडेन यूनिवर्सिटी और नीदरलैंड सरकार का आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने हमारी इस धरोहर को इतने वर्षों तक सुरक्षित रखा।
17वीं सदी में कैसे पहुंचे नीदरलैंड? इतिहासकारों के अनुसार, ये ताम्र-पत्र 17वीं सदी में फ्लोरेंटियस कैम्पर द्वारा नीदरलैंड ले जाए गए थे। दशकों तक ये कलाकृतियां शोधकर्ताओं और चुनिंदा शिक्षाविदों के लिए ही उपलब्ध थीं। अब इनके भारत लौटने से भारतीय इतिहास के अनछुए पहलुओं पर शोध करना इतिहासकारों के लिए और अधिक सुलभ हो जाएगा।
प्रवासियों से जुड़ाव के पल अपनी नीदरलैंड यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय प्रवासियों को भी संबोधित किया। उन्होंने वहां के वातावरण की तुलना घर से करते हुए झालमुड़ी जैसे घरेलू जिक्र किए, जिससे वहां मौजूद भारतीय समुदाय में काफी उत्साह देखने को मिला।
A joyous moment for every Indian!
— Narendra Modi (@narendramodi) May 16, 2026
Chola Copper Plates dating back to the 11th Century will be repatriated to India from the Netherlands. Took part in the ceremony for the same in the presence of Prime Minister Rob Jetten.
The Chola Copper Plates are a set of 21 large plates… pic.twitter.com/Zwu0QFc2ZJ
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