अमेरिका में भारतीय आमों की बहार: सिएटल के बाजार में अल्फांसो का जलवा
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सिएटल: अमेरिका के प्रशांत उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में भारतीय आमों ने धमाकेदार वापसी की है। सिएटल के बाजारों में इन आमों के पहुंचते ही भारतीय समुदाय और फल प्रेमियों के बीच जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। एक साल के विशेष प्रचार अभियान के बाद अब अल्फांसो और केसर जैसी चुनिंदा किस्में अमेरिकी स्टोर्स की शोभा बढ़ा रही हैं।

बचपन की यादों और संस्कृति का स्वाद स्थानीय स्तर पर भारतीय आमों की उपलब्धता पर चर्चा करते हुए प्रकाश गुप्ता ने बताया कि भारतीय आम केवल एक फल नहीं, बल्कि संस्कृति और बचपन की यादों का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा, भारत में आम गर्मियों के आने का प्रतीक है। जैसे सिएटल के लोग लंबी सर्दियों के बाद पहली धूप का इंतजार करते हैं, ठीक वैसे ही भारतीय समुदाय का मन इन आमों के लिए तरसता है।

मैंगो डिप्लोमेसी और बुश का वो बयान भारतीय आमों की इस लोकप्रियता के पीछे मैंगो डिप्लोमेसी का बड़ा हाथ है। इसकी शुरुआत 2006 में हुई थी, जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने भारत यात्रा के दौरान अल्फांसो चखा था। स्वाद से प्रभावित होकर उन्होंने कहा था, What a hell of a fruit. इस एक वाक्य ने अमेरिका में भारतीय आमों के लिए बाजार के दरवाजे खोल दिए थे।

Costco तक पहुंची आमों की पहुंच भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा पिछले साल आयोजित मैंगो टेस्टिंग कार्यक्रमों का ही नतीजा है कि आज ये आम केवल भारतीय स्टोर तक सीमित नहीं हैं। अब सिएटल, किर्कलैंड और रेडमंड जैसे क्षेत्रों में ये आम स्थानीय ग्रोसरी स्टोर्स के साथ-साथ दिग्गज रिटेल चेन Costco के आउटलेट्स पर भी आसानी से उपलब्ध होंगे।

भारतीय कृषि का बढ़ता प्रभाव बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय आमों की यह व्यापक पहुंच अमेरिका में न केवल भारतीय कृषि उत्पादों की मांग बढ़ाएगी, बल्कि सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूती देगी। सिएटल के बाजारों में आमों की यह भारी मांग इस बात का प्रमाण है कि स्वाद की कोई सीमा नहीं होती और भारतीय आमों का जादू एक बार फिर अमेरिकियों के सिर चढ़कर बोल रहा है।

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