H-1B वीजा विवाद: अमेरिकी सीनेटर का वीजा मंदिर पर तंज, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
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अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर चल रही बहस अब धार्मिक और सांस्कृतिक विवाद में बदल गई है। मिसौरी के रिपब्लिकन सीनेटर एरिक श्मिट ने हैदराबाद के प्रसिद्ध चिलकुर बालाजी मंदिर को निशाना बनाकर भारतीय समुदाय की नाराजगी मोल ले ली है।

वीजा मंदिर पर विवादास्पद टिप्पणी सीनेटर एरिक श्मिट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चिलकुर बालाजी मंदिर की तस्वीर साझा की। उन्होंने मंदिर को वीजा कार्टेल का केंद्र बताते हुए तंज कसा कि यहाँ हजारों भारतीय वीजा पाने के लिए प्रार्थना करते हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसी व्यवस्था अमेरिकी नागरिकों के रोजगार और वेतन को नुकसान पहुंचा रही है।

अमेरिकी मिडिल क्लास के लिए खतरा? श्मिट का आरोप है कि H-1B, L-1, F-1 और OPT जैसे वीजा कार्यक्रम अमेरिकी मिडिल क्लास को खोखला कर रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिकी छात्र भारी शिक्षा ऋण के बोझ तले दबे हैं और उन्हें उन विदेशी पेशेवरों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है, जिन्हें कथित तौर पर सब्सिडी वाला वर्क परमिट मिलता है।

टेक कंपनियों के नेटवर्क पर गंभीर आरोप सीनेटर ने टेक कंपनियों पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय वीजा धारक आपस में इंटरव्यू के सवाल साझा करते हैं। उन्होंने दावा किया कि इस नेटवर्क के जरिए बड़ी टेक कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को दरकिनार कर सस्ते श्रम को प्राथमिकता दे रही हैं, जिसका खामियाजा अमेरिकी करदाताओं को उठाना पड़ रहा है।

सोशल मीडिया पर आक्रोश श्मिट के इन बयानों के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई भारतीय यूजर्स ने सीनेटर के बयान को उनकी धार्मिक आस्था का अपमान बताया है। लोगों का कहना है कि चिलकुर बालाजी मंदिर केवल विश्वास का प्रतीक है, न कि कोई वीजा कार्टेल ।

क्यों खास है चिलकुर बालाजी मंदिर? हैदराबाद का चिलकुर बालाजी मंदिर विश्वभर में वीजा मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को विदेश यात्रा और वीजा संबंधी बाधाओं से मुक्ति मिलती है। हर साल हजारों छात्र और आईटी पेशेवर यहां अपनी मनोकामना पूर्ण होने के लिए आशीर्वाद लेने आते हैं।

H-1B वीजा में भारतीयों का दबदबा आंकड़े बताते हैं कि अमेरिकी H-1B वीजा पाने वालों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है। हर साल जारी होने वाले कुल वीजा में करीब 70 से 80 प्रतिशत हिस्सेदारी भारतीयों की होती है। यही कारण है कि अमेरिकी राजनीति में समय-समय पर यह मुद्दा चुनावी और नीतिगत बहस का केंद्र बनता रहा है।

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