क्या है हैदराबाद का वीजा मंदिर , जिस पर अमेरिकी सीनेटर ने बोला तीखा हमला?
News Image

अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर छिड़ी बहस अब एक नए मोड़ पर है। अमेरिकी सीनेटर एरिक श्मिट ने हैदराबाद के प्रसिद्ध चिलकुर बालाजी मंदिर को सीधे तौर पर निशाना बनाया है। श्मिट ने इसे कथित वीजा कार्टेल का हिस्सा बताते हुए कहा कि अमेरिकी कर्मचारियों को इस तरह के गेम्ड सिस्टम से मुकाबला नहीं करना चाहिए।

आखिर वीजा मंदिर का विवाद क्या है? सीनेटर एरिक श्मिट ने सोशल मीडिया पर मंदिर की तस्वीरें शेयर करते हुए दावा किया कि यह एक ऐसी संगठित पाइपलाइन का प्रतीक है, जहां हजारों लोग वीजा के लिए पूजा करते हैं। उन्होंने इसे एक ऐसी प्रणाली बताया जो अमेरिकी नौकरियों को प्रभावित कर रही है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है, जिसमें कई भारतीयों ने इसे हिंदू-विरोधी और अपमानजनक टिप्पणी करार दिया है।

क्या है वीजा बालाजी की हकीकत? हैदराबाद के उस्मान सागर झील के पास स्थित चिलकुर बालाजी मंदिर 500 साल पुराना है। 1990 के दशक में जब IT प्रोफेशनल्स का अमेरिका जाने का सिलसिला शुरू हुआ, तब इसे वीजा मंदिर के रूप में पहचान मिली।

इस मंदिर की खासियत यह है कि यहाँ कोई दानपेटी नहीं है, न ही यहां कोई VIP दर्शन या नारियल-फूल चढ़ाने की परंपरा है। यहाँ मान्यता है कि वीजा मिलने पर श्रद्धालु मंदिर की 108 परिक्रमा पूरी करते हैं। हर हफ्ते करीब 70 हजार लोग अपनी आस्था लेकर यहाँ पहुँचते हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी सीएस रंगराजन का कहना है, ट्रंप अस्थायी हैं, हमारे बालाजी स्थायी हैं।

H-1B वीजा और अमेरिकी राजनीति H-1B वीजा को लेकर अमेरिका में लंबे समय से विवाद चल रहा है। सीनेटर श्मिट का आरोप है कि बड़ी टेक कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालकर सस्ते विदेशी प्रोफेशनल्स को रख रही हैं। श्मिट ने इसे ग्लोबल वीजा कार्टेल का नाम दिया है, जिसमें उन्होंने फर्जी रिज्यूमे और शेल कंपनियों जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, मंदिर की यह आस्था उसी वीजा पाइपलाइन का एक हिस्सा है।

सोशल मीडिया पर क्यों है आक्रोश? सीनेटर के बयान पर भारतीय यूजर्स का कहना है कि मंदिर में प्रार्थना करना एक व्यक्तिगत आस्था है, जिसे कार्टेल कहना गलत है। लोगों का तर्क है कि वीजा का फैसला अमेरिकी दूतावास करता है, न कि कोई मंदिर। आलोचना करने वालों ने इसे नस्लवादी टिप्पणी बताते हुए कहा कि यदि अन्य धर्मों में नौकरियों के लिए प्रार्थना करना सामान्य है, तो इस पर विवाद क्यों?

यह बहस केवल वीजा नीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के IT माइग्रेशन और अमेरिकी सपने के बीच के गहरे सांस्कृतिक टकराव को दर्शाती है। चिलकुर बालाजी मंदिर आज सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि उस वैश्विक बहस का प्रतीक बन गया है जिसमें तकनीकी कौशल, रोजगार और राष्ट्रवाद आमने-सामने हैं।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

ट्रेन के टॉयलेट में आग का तांडव : सीट से निकलते अंगारे देख यात्रियों के उड़े होश

Story 1

धर्मशाला में पंजाब की दहाड़: मुंबई के सामने जीत के लिए 201 रनों का लक्ष्य

Story 1

छत्तीसगढ़: सट्टेबाज के साथ फोटो पर मची सियासी घमासान, ओपी चौधरी ने भूपेश बघेल को दिखाया आईना

Story 1

महंगाई का तगड़ा झटका: पेट्रोल-डीजल के दाम में 3 रुपये प्रति लीटर की सीधी बढ़ोतरी

Story 1

तिलक वर्मा पर नस्लीय टिप्पणी कर विवादों में फंसे अर्शदीप सिंह, सोशल मीडिया पर फूटा फैंस का गुस्सा

Story 1

चीन में अतिसुरक्षा का ड्रामा: ट्रंप के दौरे पर शी जिनपिंग की टीम ने की बदसलूकी

Story 1

अंतिम संस्कार के बाद अखिलेश यादव का वह भावुक लम्हा, जिसने हर किसी की आंखें कर दीं नम

Story 1

IPL 2026: धर्मशाला में तिलक वर्मा का तूफान, पंजाब किंग्स की लगातार पांचवीं हार

Story 1

नीट परीक्षा में बड़ा बदलाव: अब OMR शीट का खेल खत्म, अगले साल से कंप्यूटर पर होगी परीक्षा

Story 1

फाइटर जेट्स का बॉडीगार्ड बनेगा यह ताकतवर ड्रोन, भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच हुई बड़ी चर्चा