प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करने की बार-बार अपील की है। देश में ईंधन बचाने के संदेश दिए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ IPL जैसे बड़े टूर्नामेंट्स में जल रहे हजारों लीटर डीजल ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। सवाल यह है कि क्या यह भारी-भरकम ईंधन खर्च देश की ऊर्जा नीति के साथ न्याय है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, IPL का एक नाइट मैच संचालित करने के लिए स्टेडियम में निरंतर बिजली बैकअप, जनरेटर, ब्रॉडकास्टिंग यूनिट्स और भारी मशीनरी का इस्तेमाल होता है। एक मैच के दौरान करीब 2500 से 3000 लीटर डीजल की खपत होती है। अगर इसे रुपये में आंका जाए, तो एक रात के खेल में महज ईंधन के रूप में ही करीब ढाई लाख रुपये जल जाते हैं। पूरे टूर्नामेंट में यह आंकड़ा 1.5 लाख लीटर डीजल तक पहुंच सकता है।
सोशल मीडिया पर आम जनता इस दोहरे मापदंड को लेकर खासी नाराज है। एक्स यूजर्स का कहना है कि जब आम आदमी के लिए पेट्रोल बचाना देशहित में बताया जा रहा है, तो फिर चार्टर्ड फ्लाइट्स, स्टेडियम की फ्लडलाइट्स और लग्जरी बसों के काफिले में हो रहे ईंधन के अंधाधुंध इस्तेमाल को कार्बन न्यूट्रल कैसे माना जा सकता है? कई लोगों ने तंज कसा है कि देश का तेल बचाने का सारा बोझ सिर्फ आम आदमी के कंधों पर क्यों है?
प्रधानमंत्री की अपील के पीछे वैश्विक तनाव एक बड़ा कारण है। इजरायल-ईरान संघर्ष के चलते स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर संकट गहरा गया है, जिससे वैश्विक तेल और गैस सप्लाई बाधित हो रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 50% तक बढ़ चुकी हैं। भारत अपनी ईंधन जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर हमारी अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है।
अब देश में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या मौजूदा आर्थिक और वैश्विक ऊर्जा संकट के समय में इस तरह के बड़े आयोजनों में ईंधन की इतनी बड़ी बर्बादी जायज है? जहां एक तरफ सरकार मिशन ऊर्जा सुरक्षा के तहत जनता से त्याग की उम्मीद कर रही है, वहीं दूसरी ओर IPL जैसे हाई-प्रोफाइल इवेंट्स में हो रहा डीजल का यह बेतहाशा खर्च सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। क्या हमें मनोरंजन के नाम पर ऊर्जा का यह अपव्यय जारी रखना चाहिए? यह वह सवाल है जिसका जवाब न केवल क्रिकेट प्रेमियों बल्कि नीति निर्माताओं को भी तलाशना होगा।
Cancelling One IPL match can save 25000 litres of petrol.
— amit kilhor (@amitkilhor) May 12, 2026
We should cancel house entertainment and political events, combined with voluntary measures, it ll help the country as a whole.
#amitkilhor #kilhor #petrol #ipl pic.twitter.com/cd1snQ12AW
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