पीएम मोदी की अपील पर भड़कीं प्रियंका चतुर्वेदी, पूछा- जब सब जनता करेगी, तो सरकार की जिम्मेदारी क्या है?
News Image

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील ने देश में राजनीतिक बहस छेड़ दी है। पीएम ने जनता से ईंधन बचाने, वर्क फ्रॉम होम अपनाने और विलासिता में कटौती करने का आग्रह किया था। अब शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस पर तीखा पलटवार करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

इलेक्शन खत्म होते ही बढ़े LPG के दाम प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब तक चुनाव प्रचार चल रहा था, सरकार ने सब कुछ सामान्य होने का दावा किया था, लेकिन दूसरे चरण की वोटिंग खत्म होते ही एलपीजी सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए। उन्होंने पूछा कि जो सरकार चुनाव के दौरान सब कुछ कंट्रोल में होने का दावा कर रही थी, वह अब जनता को त्याग की नसीहत क्यों दे रही है।

क्या वीवीआईपी कल्चर पर लगेगी रोक? प्रियंका ने पीएम की अपील का जिक्र करते हुए कहा कि अगर जनता को वर्क फ्रॉम होम करने, कार पूलिंग करने और विदेश यात्राएं बंद करने को कहा जा रहा है, तो सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। उन्होंने सवाल किया, क्या सरकार वीवीआईपी मूवमेंट और मंत्रियों के लंबे काफिलों पर रोक लगाएगी? क्या चुनाव में भारी रैलियों के लिए इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों और शपथ ग्रहण समारोहों में प्राइवेट जेट के उपयोग में कटौती की जाएगी?

नसीहतें क्या भाजपा नेताओं पर भी लागू होंगी? शिवसेना नेता ने तंज कसते हुए कहा कि अगर आम जनता को सोना न खरीदने या शादियां टालने की सलाह दी जा रही है, तो क्या यही नियम भाजपा के मंत्रियों और नेताओं पर भी लागू होंगे? उन्होंने हिमंत बिस्वा सरमा के शपथ ग्रहण समारोह का उदाहरण देते हुए कहा कि क्या सरकार इसे सादगी से या वर्चुअल माध्यम से करने का साहस दिखाएगी, जैसा वे जनता से करने को कह रहे हैं।

पीएम मोदी ने क्या की थी अपील? गौरतलब है कि 10 मई को एक जनसभा के दौरान पीएम मोदी ने आर्थिक स्थिति को देखते हुए जनता से कई अपील की थी। इसमें पेट्रोल-डीजल की बचत, इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग, कार पूलिंग, वर्क फ्रॉम होम को प्राथमिकता, विदेशी दौरों और शादियों में कटौती, एक साल तक सोना न खरीदने और केमिकल खाद का उपयोग कम करने जैसे सुझाव शामिल थे।

प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि सरकार को केवल जनता को उपदेश देने के बजाय खुद भी उदाहरण पेश करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल जनता के भरोसे देश का खर्च या आर्थिक संतुलन नहीं बन सकता, जब तक प्रशासन में फिजूलखर्ची खत्म न हो।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

सोते हुए शख्स पर सांप का जानलेवा हमला, वीडियो देख रोंगटे खड़े हो जाएंगे

Story 1

शादी बनी अखाड़ा: वरमाला के मंच पर दूल्हा-दुल्हन के बीच जमकर हुई मारपीट, वीडियो वायरल

Story 1

शपथ ग्रहण का काउंटडाउन: हिमंता सरमा के साथ ये 4 चेहरे संभालेंगे असम की कमान

Story 1

कमेंट्री बॉक्स में बवाल: क्रुणाल पांड्या पर बद्रीनाथ की विवादित टिप्पणी, फिर दी सफाई

Story 1

क्या झारखंड भाजपा का सिस्टम आउटडेटेड हो गया है? पार्टी में अब सॉफ्टवेयर बदलने की मांग

Story 1

पीए मर्डर मिस्ट्री: मजार पर चादर, अयोध्या में दर्शन... फिर कोलकाता में कत्ल कैसे? मां का चौंकाने वाला दावा

Story 1

तमिलनाडु की सियासत में बड़ा भूचाल: AIADMK में दो फाड़, बागी गुट ने थमाई मुख्यमंत्री विजय को सत्ता की चाबी

Story 1

असम में हिमंता बिस्वा सरमा का भव्य शपथ ग्रहण: कल सुबह 11:40 बजे संभालेंगे सत्ता की बागडोर

Story 1

रील लाइफ से रियल लाइफ तक: थलापति विजय के CM बनने पर मलेशियाई PM का क्रांतिकारी संदेश

Story 1

क्या क्रुणाल पंड्या के दिल में अब भी है हार्दिक के लिए जगह? पोलार्ड के बहाने छलका दर्द!