प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से जनता से की गई बचत की अपील पर राजनीतिक गलियारों में घमासान मच गया है। ईरान-इजराइल तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच पीएम मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने, अनावश्यक विदेश यात्राएं टालने और एक साल तक गैर-जरूरी सोना न खरीदने का आग्रह किया था।
अखिलेश यादव का सीधा हमला: जुमले की अर्थव्यवस्था
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस अपील पर तंज कसते हुए कहा कि चुनाव खत्म होते ही सरकार को संकट याद आ गया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, देश के लिए संकट सिर्फ एक है और उसका नाम भाजपा है।
अखिलेश ने सवाल उठाया कि अगर सरकार को इतनी पाबंदियां लगानी पड़ रही हैं, तो फिर पांच ट्रिलियन डॉलर वाली अर्थव्यवस्था का वादा क्या था? उन्होंने आरोप लगाया कि सोना खरीदने से बचने की सलाह आम जनता को नहीं, बल्कि भाजपा नेताओं और काला धन रखने वालों को दी जानी चाहिए।
क्या चुनाव प्रचार में ईंधन बचाना जरूरी नहीं था?
सपा अध्यक्ष ने भाजपा के चुनावी अभियानों और चार्टर उड़ानों पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने पूछा कि अगर देश में ईंधन बचाने की इतनी ही चिंता थी, तो चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का इस्तेमाल क्यों नहीं किया? अखिलेश का मानना है कि इस तरह की सरकारी अपीलों से बाजार में डर का माहौल बनता है और महंगाई-मंदी की आशंका गहराती है।
खरगे का तंज: जब देश को जरूरत थी, तब पीएम प्रचार में व्यस्त थे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि जब जनता गरीबी और महंगाई की मार झेल रही है, तब पीएम उन्हें बचत का पाठ पढ़ा रहे हैं।
खरगे ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव तो फरवरी से ही शुरू हो गया था। तब कांग्रेस ने सरकार को पेट्रोल-डीजल और आर्थिक हालात के प्रति आगाह किया था, लेकिन उस समय पीएम मोदी चुनाव प्रचार और रोड शो में व्यस्त थे। उन्होंने सवाल किया कि तब क्यों कहा जा रहा था कि सब चंगा सी ?
पीएम मोदी ने क्यों की थी अपील?
प्रधानमंत्री ने हैदराबाद के एक कार्यक्रम में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भारी दबाव है। विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने और देश की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचाने के लिए ऊर्जा की बचत और अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण जरूरी है। हालांकि, विपक्ष इसे सरकार की आर्थिक मोर्चे पर विफलता बताकर घेरने में जुटा है।
चुनाव ख़त्म होते ही, ‘संकट’ याद आ गया!
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) May 11, 2026
दरअसल देश के लिए ‘संकट’ सिर्फ़ एक है और उसका नाम है : ‘भाजपा’
इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो ‘पंच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था’ कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का… pic.twitter.com/2f8utdxbLR
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