पंजाब की सियासत में बड़ा उलटफेर: सीएम भगवंत मान के भाई ने छोड़ा आप , थामा भाजपा का दामन
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पंजाब की राजनीति में सोमवार को उस समय बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया, जब मुख्यमंत्री भगवंत मान के मौसेरे भाई और उनके बेहद करीबी माने जाने वाले ज्ञान सिंह मान ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया। चंडीगढ़ में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली।

आप के लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्य का भाजपा में शामिल होना आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए एक गहरा मनोवैज्ञानिक झटका है। ऐसे समय में जब पार्टी पहले ही कई मोर्चों पर कमजोर पड़ रही है, इस घटना ने मुख्यमंत्री की साख और पार्टी की आंतरिक मजबूती पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

ज्ञान सिंह मान के साथ कई बड़े चेहरे भी गए ज्ञान सिंह मान अकेले नहीं, बल्कि उनके साथ बलजिंदर सिंह वड़िंग और मनजिंदर सिंह जैसे प्रभावशाली नेताओं ने भी भाजपा का रुख किया है। सदस्यता लेने के बाद ज्ञान सिंह मान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और पार्टी के विजन की सराहना की। साथ ही, उन्होंने पंजाब सरकार की वर्तमान कार्यशैली पर भी अपना असंतोष जाहिर किया।

मंत्री की गिरफ्तारी ने बढ़ाई मुश्किलें मुख्यमंत्री भगवंत मान के लिए परेशानियां केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि कानूनी भी हैं। पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा की ईडी द्वारा गिरफ्तारी ने सरकार की साख पर गहरा असर डाला है। अरोड़ा पर 157.12 करोड़ रुपये की जीएसटी धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। गुरुग्राम की अदालत ने उन्हें सात दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है, जिससे सरकार बैकफुट पर है।

राज्यसभा में टूट और ऑपरेशन लोटस की चर्चा पंजाब की सियासत में ऑपरेशन लोटस की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। हाल ही में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल और हरभजन सिंह जैसे सात राज्यसभा सांसदों का पार्टी छोड़ना आप के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था। अब मुख्यमंत्री के भाई का जाना यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर गहरा असंतोष पनप रहा है।

क्या पंजाब में बदल रही है हवा? हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने दावा किया है कि पंजाब की जनता अब आप की नीतियों से ऊब चुकी है और बदलाव चाहती है। सुनील जाखड़ के नेतृत्व में पंजाब भाजपा लगातार आक्रामक रुख अपना रही है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि परिवार में हुई यह सेंधमारी भगवंत मान के लिए आगामी चुनावों से पहले एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि सीएम मान इस दोहरी चुनौती का सामना कैसे करते हैं।

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