फाल्टा विधानसभा सीट: चुनाव रद्द होने के पीछे की खौफनाक सच्चाई, मतदान में हुई थी ये धांधली
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पश्चिम बंगाल की फाल्टा विधानसभा सीट पर हुए मतदान को लेकर चुनाव आयोग की रिपोर्ट ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है। मतदान में हुई व्यापक अनियमितताओं के चलते आयोग ने यहां चुनाव रद्द कर नई तारीखों का ऐलान कर दिया है। यह मामला केवल चुनावी गड़बड़ी का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की नींव पर प्रहार का है।

ईवीएम के साथ खेल : टेप और इत्र का इस्तेमाल जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के साथ छेड़छाड़ को लेकर हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, 60 मतदान केंद्रों पर बैलेट यूनिट के बटनों पर काली टेप और गोंद चिपकाया गया था, ताकि मतदाता अपनी पसंद के उम्मीदवार को वोट न दे सकें। इससे भी गंभीर आरोप बटनों पर इत्र लगाने का है, जिसका मकसद यह ट्रैक करना था कि किस मतदाता ने किस उम्मीदवार को वोट दिया। यह सीधे तौर पर मतदाता की गोपनीयता (Privacy) का उल्लंघन है।

कंपैनियन वोटिंग के नाम पर फर्जीवाड़ा मतदान केंद्रों पर बड़े स्तर पर कंपैनियन वोटिंग का सहारा लेकर फर्जी मतदान कराए गए। रिपोर्ट में कहा गया है कि बूथों के अंदर राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं का अवैध कब्जा था। कहीं एक ही व्यक्ति ने बार-बार वोट डाले, तो कहीं मतदान कक्ष के अंदर एक साथ दो लोग मौजूद पाए गए। पोलिंग एजेंटों पर भी खुद मतदाताओं की जगह वोट डालने का गंभीर आरोप है।

गायब हुए वीडियो फुटेज, सबूतों से छेड़छाड़ सबूतों को मिटाने की कोशिश भी साफ दिखी। कई बूथों पर मतदान के अंतिम घंटों के वीडियो फुटेज या तो गायब थे या फिर उनमें किसी अन्य राज्य के पुराने चुनाव के वीडियो मिले। कुछ रिकॉर्डिंग चिप्स खाली पाई गईं और क्लाउड स्टोरेज का डेटा भी अधूरा था। इन तकनीकी खामियों ने जांच प्रक्रिया को और अधिक जटिल बना दिया है।

प्रशासनिक मिलीभगत और जमीनी हकीकत पूरे मामले में प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। पीठासीन अधिकारियों और मतदान स्टाफ ने अपनी जिम्मेदारियों को ताक पर रखा। रिटर्निंग ऑफिसर और जनरल ऑब्जर्वर द्वारा भेजी गई एक्शन टेकन रिपोर्ट जमीनी हकीकत से बिल्कुल अलग थी। सबसे चिंताजनक यह है कि जब तक कार्रवाई शुरू हुई, तब तक 86 प्रतिशत मतदान विवादित परिस्थितियों में संपन्न हो चुका था।

यह घटना चुनावी प्रबंधन की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाती है। चुनाव आयोग के लिए अब बड़ी चुनौती उन जिम्मेदार अधिकारियों और तत्वों पर कार्रवाई करना है, जिन्होंने निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया को एक खेला बना दिया था। लोकतंत्र की मजबूती के लिए इस पूरे प्रकरण की गहन जांच और दोषियों को मिसाल के तौर पर सजा देना अनिवार्य है।

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