नेताओं के बिस्तर से शुरू होता है करियर : पप्पू यादव के विवादित बोल पर मचा बवाल, महिला आयोग ने भेजा नोटिस
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पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव एक बार फिर अपने बेहद आपत्तिजनक बयान को लेकर विवादों के घेरे में हैं। राजनीति में महिलाओं की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि 90% महिलाएं नेताओं के कमरे में जाए बिना राजनीति में आगे नहीं बढ़ सकतीं। इस बयान के बाद देश भर में आक्रोश का माहौल है।

महिला आयोग का एक्शन, पप्पू यादव का पलटवार इस बयान का संज्ञान लेते हुए बिहार राज्य महिला आयोग ने पप्पू यादव को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि, नोटिस मिलने के बाद भी पप्पू यादव के तेवर नरम होने के बजाय और सख्त हो गए हैं। उन्होंने नोटिस भेजने वालों की निष्पक्षता पर ही सवाल उठा दिए हैं।

70-80% राजनेता पोर्न देखते हैं पप्पू यादव ने अपनी सफाई में बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, मैंने सदन के पटल पर भी यह बात कही है कि 70-80% राजनेता पोर्न देखते हैं। अगर मेरे फोन में ऐसी कोई सामग्री मिलती है, तो मेरी भी जांच की जाए। जो लोग मुझे नोटिस भेज रहे हैं, उनके संबंध पूर्व मंत्रियों के साथ जगजाहिर हैं।

शीशे के घरों में रहने वाले न फेंकें पत्थर सांसद ने खुद का बचाव करते हुए कहा कि वे महिलाओं की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि देश में 755 पुरुष राजनेताओं के खिलाफ यौन शोषण के मामले दर्ज हैं और 155 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, जो लोग महिलाओं का शोषण करते हैं, वही महिला आरक्षण की बात करते हैं।

कौन हैं पप्पू यादव? राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव बिहार की राजनीति का एक चर्चित और विवादित चेहरा हैं। 24 दिसंबर 1967 को जन्मे पप्पू यादव ने 1990 के दशक में राजनीति में कदम रखा। वे 1991 से 2024 के बीच छह बार लोकसभा सांसद चुने जा चुके हैं। अपनी बाहुबली छवि और निर्दलीय चुनाव जीतने की क्षमता के लिए वे खासे मशहूर रहे हैं।

राजनीतिक सफर का संक्षिप्त परिचय पप्पू यादव ने अपने करियर में समाजवादी पार्टी, लोजपा और राजद जैसी कई पार्टियों के साथ काम किया। 2015 में उन्होंने जन अधिकार पार्टी बनाई थी, लेकिन मार्च 2024 में उसका कांग्रेस में विलय कर दिया। हालिया लोकसभा चुनाव में उन्होंने पूर्णिया सीट से निर्दलीय ताल ठोकते हुए जेडीयू और आरजेडी के दिग्गजों को हराकर अपनी ताकत साबित की थी।

फिलहाल, इस बयान के बाद पप्पू यादव चौतरफा घिरे हुए हैं। महिला आयोग की कार्रवाई और इस बयान पर सियासी गलियारों में बहस छिड़ गई है कि क्या राजनीति में महिलाओं के सम्मान को लेकर की गई यह टिप्पणी सच है या केवल एक सस्ती पब्लिसिटी का जरिया।

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