इस्लामाबाद वार्ता के लिए मिस्टर बीन बने जेडी वेंस, ईरान ने मीम से उड़ाया अमेरिका का मजाक
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इस्लामाबाद: ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाली बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता सिरे नहीं चढ़ सकी। जहाँ एक ओर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वार्ता की उम्मीद में तैयारी करते रहे, वहीं ईरान ने मीम के जरिए उनका जमकर मजाक उड़ाया है।

मिस्टर बीन बनकर रह गए जेडी वेंस इंडोनेशिया में स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक व्यंग्यात्मक पोस्ट किया। उन्होंने मशहूर कॉमेडियन मिस्टर बीन के एक प्रसिद्ध वीडियो को एडिट किया, जिसमें मिस्टर बीन खाली बेंच पर घंटों इंतजार करते नजर आते हैं। दूतावास ने इस वीडियो में मिस्टर बीन के चेहरे की जगह जेडी वेंस का चेहरा लगा दिया और कैप्शन लिखा, बातचीत शुरू होने का इंतजार करते हुए...

अमेरिका को क्यों लग सकती है मिर्ची? ईरान का यह मीम गेम वैश्विक मंच पर अमेरिका के लिए काफी शर्मिंदगी भरा माना जा रहा है। जिस अमेरिका ने एक दिन पहले तक ईरान पर भारी बमबारी की चेतावनी दी थी, वार्ता विफल होने और सीजफायर बढ़ने के बाद उसे सोशल मीडिया पर इस तरह के उपहास का सामना करना पड़ रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप का पलटवार वार्ता रद्द होने पर डोनाल्ड ट्रंप ने अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान की सरकार अंदरूनी कलह और गुटबाजी से बंटी हुई है। ट्रंप ने दावा किया कि पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ के विशेष अनुरोध पर उन्होंने हमले को फिलहाल रोका है, ताकि ईरान को अपने प्रस्ताव पर एक राय बनाने का मौका मिल सके।

ईरान का आक्रामक रुख ईरान ने इस शांति वार्ता के विफल होने को अपनी जीत के रूप में पेश किया है। ईरानी संसद के स्पीकर के सलाहकार महदी मोहम्मदी ने अमेरिका पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने कहा कि हारने वाला पक्ष शर्तें तय नहीं कर सकता। मोहम्मदी ने आरोप लगाया कि अमेरिका सीजफायर का समय केवल सरप्राइज स्ट्राइक की तैयारी के लिए खरीद रहा है।

ईरान वार्ता में क्यों नहीं आया? कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, ईरान के पीछे हटने के मुख्य रूप से चार कारण माने जा रहे हैं:

  1. सीजफायर पर अविश्वास: ईरान को डर है कि अमेरिका सीजफायर की आड़ में अपनी सैन्य स्थिति मजबूत कर रहा है।
  2. आंतरिक राजनीति: ईरान सरकार के भीतर सत्ता संघर्ष के कारण किसी एक प्रतिनिधि पर आम सहमति नहीं बन पाई।
  3. शर्तों का पेंच: अमेरिकी नाकाबंदी के चलते ईरान किसी भी दबाव वाली वार्ता के लिए तैयार नहीं है।
  4. रणनीतिक बढ़त: ईरान बातचीत की मेज पर बैठकर अपनी ताकत कम नहीं करना चाहता, वह सीजफायर को अपनी जीत के तौर पर भुना रहा है।

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