अमेरिका-ईरान तनाव: क्या 14 दिन का सीजफायर टाल पाएगा महायुद्ध? पाकिस्तान की आखिरी कोशिश
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अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनावपूर्ण युद्धविराम (सीजफायर) की समयसीमा समाप्त होने में अब केवल कुछ ही घंटे बचे हैं। इस बीच, मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने दोनों देशों से युद्धविराम को 14 और दिनों के लिए बढ़ाने की अपील की है।

इस गंभीर स्थिति पर दुनिया की नजरें टिकी हैं कि क्या कूटनीति एक बार फिर युद्ध को टाल पाएगी या क्षेत्र में नई हिंसा का दौर शुरू होगा।

कूटनीति को एक और मौका देने की अपील

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने बुधवार को समाप्त हो रहे सीजफायर से ठीक पहले यह अनुरोध किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि डिप्लोमेसी और बातचीत को एक और मौका दिया जाना चाहिए ताकि किसी ठोस समाधान तक पहुंचा जा सके।

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भी पुष्टि की है कि इस्लामाबाद इस बातचीत में ईरान को शामिल करने के लिए सक्रिय है। हालांकि, तेहरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

इस्लामाबाद वार्ता पर बरकरार सस्पेंस

इस्लामाबाद में होने वाले दूसरे दौर की बातचीत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। जहां चर्चा है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान पहुंच सकता है, वहीं ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसका कोई भी डेलिगेशन फिलहाल इस्लामाबाद नहीं गया है।

ईरान का रुख सख्त है। तेहरान ने साफ कहा है कि वह धमकी के माहौल में बातचीत नहीं करेगा। जब तक अमेरिका अपने रवैये में बदलाव नहीं करता, तब तक बातचीत आगे बढ़ना मुश्किल है।

ट्रंप की सख्त समयसीमा और युद्ध की आहट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख बेहद आक्रामक है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि सीजफायर बुधवार रात 8 बजे (अमेरिकी समय) के बाद मान्य नहीं होगा। उन्होंने इसके विस्तार के संकेत नहीं दिए हैं।

यदि अमेरिका और ईरान गुरुवार सुबह तक किसी समझौते पर नहीं पहुँचते हैं, तो युद्ध की विभीषिका फिर से शुरू हो सकती है। ट्रंप ने हाल ही में 8 महिलाओं की रिहाई के लिए एक भावनात्मक अपील भी की थी, जिसके जवाब का अभी भी इंतजार है।

क्या पाकिस्तान की अपील काम आएगी?

पाकिस्तान लगातार दोनों देशों के संपर्क में है, लेकिन ईरान द्वारा बातचीत पर ब्रेक लगाए जाने से उसकी मध्यस्थता को बड़ा झटका लगा है।

अब पूरी दुनिया इस बात का इंतजार कर रही है कि क्या वाशिंगटन और तेहरान, पाकिस्तान की इस 14-दिवसीय विस्तार वाली अपील को स्वीकार करते हैं, या फिर कूटनीति के विफल होते ही क्षेत्र में एक बड़ा संघर्ष छिड़ जाएगा।

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