अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि ईरान ने समझदारी भरा समझौता नहीं चुना, तो उसे पहले से भी अधिक विनाशकारी हमलों और पूर्ण नाकाबंदी का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के परमाणु महत्वाकांक्षाओं को रोकने के लिए अमेरिका किसी भी हद तक जा सकता है।
हेगसेथ ने ईरानी सैन्य नेतृत्व को चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका ईरान की हर हलचल पर नजर रख रहा है। उन्होंने कहा, यह बराबरी की लड़ाई नहीं है। यदि आप गलत चुनाव करते हैं, तो हम आपके बिजली संयंत्रों, ऊर्जा उद्योग और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर बमबारी करने के लिए तैयार हैं। हम एक बटन दबाते ही कार्रवाई करने की स्थिति में हैं।
अमेरिकी ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने केवल होर्मुज जलडमरूमध्य ही नहीं, बल्कि सीधे तौर पर ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर दी है। अमेरिकी नौसेना अब ईरानी तेल ले जाने वाले डार्क फ्लीट जहाजों समेत किसी भी संदिग्ध जहाज को रोकने और जब्त करने का पूरा अधिकार रखती है। व्यापारिक जहाजों को वापस लौटने के आदेश दिए गए हैं।
अमेरिका ईरान पर दोतरफा दबाव बना रहा है। एक तरफ सैन्य घेराबंदी है, तो दूसरी तरफ ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी के जरिए आर्थिक गला घोंटने की रणनीति। पेंटागन का कहना है कि ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था से अलग-थलग करना उनकी प्राथमिकता है ताकि वह परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
इस तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने चिंता जताई है कि यूरोप के पास केवल छह सप्ताह का जेट ईंधन बचा है। यदि नाकाबंदी जारी रही, तो उड़ानों के रद्द होने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल की आशंका है। वहीं, चीन ने भी ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को निर्बाध रखने की मांग की है।
तनावपूर्ण स्थिति के बीच, यह देखना बाकी है कि क्या ईरान अमेरिकी दबाव के आगे झुकता है या सैन्य संघर्ष की ओर कदम बढ़ाता है।
Secretary Hegseth just delivered a message to Iranian military leadership:
— DOW Rapid Response (@DOWResponse) April 16, 2026
We are watching you. Our capabilities are not the same—our military and yours. Remember, this is NOT A FAIR FIGHT.
We know what military assets you are moving and where you are moving them. While you… pic.twitter.com/Mo5F5nBhIg
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