परिसीमन बिल: स्टालिन ने जलाई कॉपी, बोले- पूरे द्रविड़ क्षेत्र में फैलेगी विरोध की आग
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तमिलनाडु में राजनीतिक पारा अचानक चढ़ गया है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन बिल के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आज सुबह बिल की एक कॉपी सार्वजनिक रूप से जला दी। इसके साथ ही उन्होंने पूरे प्रदेश में इस कानून के विरोध में काला झंडा फहराकर बड़े आंदोलन की शुरुआत की है।

दिल्ली को चेतावनी: हिंदी विरोध जैसे होंगे परिणाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्टालिन ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि जिस तरह तमिलनाडु में हिंदी-विरोधी आंदोलन की आग ने दिल्ली को झुलसने पर मजबूर कर दिया था, वही स्थिति इस बिल के साथ होगी। उन्होंने कहा, तमिल लोगों को उनकी ही जमीन पर शरणार्थी बनाने वाले इस काले कानून का मैंने अंत कर दिया है। यह आग पूरे द्रविड़ क्षेत्र में फैलेगी और सरकार का अहंकार झुका देगी।

विवाद की जड़: लोकसभा सीटों का गणित विरोध का मुख्य कारण केंद्र सरकार की वह योजना है, जिसके तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने की तैयारी है। तमिलनाडु सरकार के मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी ने आरोप लगाया कि यह बिल राज्यों के अधिकारों पर सीधा हमला है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में सांसदों की संख्या 80 से बढ़कर 120 हो जाएगी, जबकि दक्षिणी राज्यों का राजनीतिक महत्व कम हो जाएगा।

नारी शक्ति वंदन और परिसीमन का मेल केंद्र सरकार 2029 के आम चुनावों से पहले नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को लागू करने के लिए संविधान में संशोधन करना चाहती है। सरकार की योजना 2027 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों का पुनर्सीमांकन करने की है। इसी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए संसद का विशेष सत्र भी बुलाया गया है, जिस पर विपक्षी दलों ने तीखी आपत्ति जताई है।

विपक्ष और जनता का रुख राज्य सरकार के मंत्रियों ने अपने घरों पर काले झंडे फहराकर इस बिल को टकराव का जरिया बताया है। राज्य सरकार का आरोप है कि ड्राफ्ट रिपोर्ट अब तक विपक्षी दलों के साथ साझा नहीं की गई है और बिना चर्चा के इसे थोपा जा रहा है। सीएम स्टालिन ने आम जनता से अपील की है कि वे इस बिल के खिलाफ एकजुट हों और शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराएं।

संसद के विशेष सत्र में इस बिल के पेश होने के साथ ही केंद्र और दक्षिणी राज्यों के बीच का यह संघर्ष और अधिक तीव्र होने की संभावना है। फिलहाल, तमिलनाडु सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।

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