होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका की आर्थिक घेराबंदी : क्या ईरान की अर्थव्यवस्था का होगा अंत?
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होर्मुज बना जंग का नया अखाड़ा इस्लामाबाद वार्ता के विफल होते ही अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। होर्मुज स्ट्रेट, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारों में से एक है, अब पूरी तरह से अमेरिकी नौसेना के नियंत्रण में है। CENTCOM ने ईरानी बंदरगाहों की पूर्ण नाकेबंदी लागू कर दी है।

36 घंटे में ठप हुआ ईरानी व्यापार अमेरिकी कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, नाकेबंदी लागू होने के 36 घंटों के भीतर ही ईरान का समुद्री व्यापार पूरी तरह बंद हो चुका है। ईरान की 90% अर्थव्यवस्था समुद्री मार्ग पर निर्भर है, ऐसे में यह कदम तेहरान के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।

रणभूमि में उतरे अमेरिकी जंगी बेड़े राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मिशन के लिए 15 से अधिक युद्धपोत तैनात किए हैं। इनमें यूएसएस त्रिपोली (LHA 7) सबसे शक्तिशाली है, जो F-35B लाइटनिंग स्टील्थ फाइटर जेट्स और MV-22 ऑस्प्रे विमानों से लैस है। अमेरिकी सेना ने साफ कर दिया है कि ईरान जाने वाले या वहां से आने वाले किसी भी जहाज को नहीं बख्शा जाएगा।

क्या ईरान पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नाकेबंदी लंबी खिंची, तो ईरान की आर्थिक कमर टूट जाएगी। युद्ध के कारण ईरान को अब तक 270 अरब से 1 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो चुका है, जबकि करीब 3,000 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। तेल निर्यात बंद होने से ईरान के पास विदेशी मुद्रा का संकट गहरा जाएगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा सीधा असर यह ब्लॉक केवल ईरान के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार के लिए भी चिंताजनक है। यदि होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता है, तो भारत और चीन सहित कई एशियाई देशों को भारी ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिका की यह आर्थिक स्ट्राइक ईरान को घुटनों पर लाने की अंतिम कोशिश मानी जा रही है।

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