होर्मुज में तनाव चरम पर: अमेरिका की दो टूक - वापस मुड़ो वरना भुगतो परिणाम
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होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में नाकेबंदी शुरू कर दी है, जिससे मध्य पूर्व में संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।

अमेरिका की सख्त चेतावनी

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस कार्रवाई को आक्रामक रूप से लागू किया है। सोशल मीडिया पर जारी एक ऑडियो संदेश में अमेरिकी नौसेना ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरानी बंदरगाहों से आने या जाने वाले किसी भी जहाज को बख्शा नहीं जाएगा।

चेतावनी में कहा गया है, नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश न करें। यदि आदेशों का पालन नहीं किया गया और जहाज वापस नहीं मुड़े, तो बल प्रयोग किया जाएगा। अमेरिकी बल इन जहाजों को रोकने और जब्त करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

युद्धपोत अब्राहम लिंकन का मोर्चा

इस अभियान को अंजाम देने के लिए अमेरिका ने अपने शक्तिशाली USS अब्राहम लिंकन स्ट्राइक कैरियर ग्रुप को तैनात किया है। लगभग 5,000 नाविक और मरीन इस मिशन का हिस्सा हैं। ये युद्धपोत अरब सागर में रहकर लगातार निगरानी कर रहे हैं और ईरानी सीमा के करीब गुजरने वाले जहाजों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

ईरान का पलटवार

ईरान ने अमेरिकी नाकेबंदी को न केवल गैर-कानूनी करार दिया है, बल्कि इसे एक गंभीर उकसावा भी बताया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका की यह कार्रवाई नाजुक संघर्ष-विराम का उल्लंघन है।

बगाई ने चेतावनी दी है कि यदि यह हस्तक्षेप जारी रहा, तो ईरान अपने सशस्त्र बलों को जवाबी कार्रवाई के लिए मजबूर करेगा। ईरान का कहना है कि वे दशकों से इस जलमार्ग की सुरक्षा के रक्षक रहे हैं और वे विदेशी दखल के बिना इसे सुरक्षित रखने में सक्षम हैं।

क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा

ईरान का मानना है कि पिछले 40 दिनों से होर्मुज में जो अस्थिरता है, वह अमेरिका द्वारा थोपे गए तनाव का परिणाम है। बगाई ने साफ़ कहा कि किसी भी विदेशी हस्तक्षेप से स्थिति और अधिक जटिल होगी। ईरान का रुख साफ है: यदि क्षेत्र से अमेरिकी आक्रामकता खत्म हो जाए, तो जलमार्ग की सुरक्षा के लिए किसी बाहरी ताकत की जरूरत नहीं है।

फिलहाल, होर्मुज के समुद्री मार्ग पर भारी युद्धपोतों की मौजूदगी ने वैश्विक व्यापार और क्षेत्र की शांति के लिए चिंता का विषय खड़ा कर दिया है। दोनों पक्षों की सख्ती यह संकेत दे रही है कि आने वाले दिन बेहद चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

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