महिला आरक्षण बिल: संसद के विशेष सत्र में संग्राम के आसार, विपक्ष ने खोला मोर्चा
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संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र गुरुवार से शुरू हो रहा है। केंद्र सरकार इस दौरान तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है, जो महिला आरक्षण, लोकसभा सीटों की संख्या और परिसीमन से जुड़े हैं। हालांकि, इन विधेयकों के पेश होने से पहले ही विपक्ष ने कड़े तेवर अपना लिए हैं।

विधेयकों का खाका और सरकार की तैयारी सरकार संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इनका उद्देश्य नई जनगणना के आधार पर परिसीमन करना, लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना और महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण सुनिश्चित करना है।

कांग्रेस का आरोप: महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन का खेल कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने इन विधेयकों को छल-कपट करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर एक ऐसा परिसीमन थोप रही है, जो उन राज्यों को लाभ पहुंचाता है जहां भाजपा मजबूत है। कांग्रेस का कहना है कि इससे अन्य राज्यों की सापेक्ष शक्ति कम हो जाएगी।

विपक्ष की दो टूक मांग विपक्ष का कहना है कि वे महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वे परिसीमन के प्रावधानों का पुरजोर विरोध करेंगे। विपक्ष की मांग है कि बिना किसी शर्त के लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों में से महिलाओं के लिए आरक्षण लागू हो। साथ ही, उन्होंने इसमें एससी, एसटी और ओबीसी महिलाओं के लिए कोटे की मांग भी दोहराई है।

भाजपा शक्ति बिल का तंज शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार इस बिल की आड़ में अपना राजनीतिक एजेंडा साध रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, आपको नारी शक्ति बिल का नाम बदलकर भाजपा शक्ति बिल कर देना चाहिए। यह सरकार की गुप्त योजना है।

सपा और अन्य दलों की आपत्तियां समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इसे खुफिया लोगों की गुप्त योजना बताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि बिना सही आंकड़ों के आरक्षण का लाभ कैसे दिया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दलितों, मुसलमानों और पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व के प्रति गंभीर नहीं है।

सरकार का पलटवार वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि परिसीमन को लेकर अनावश्यक भ्रम फैलाया जा रहा है। रिजिजू ने स्पष्ट किया कि दक्षिण भारत या किसी भी राज्य के साथ भेदभाव का कोई मुद्दा नहीं है और संसद में सब कुछ साफ हो जाएगा।

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