नारी शक्ति वंदन: संसद का विशेष सत्र और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी का नया अध्याय
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संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र आज से शुरू हो गया है। इस सत्र का मुख्य आकर्षण नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण कानून) को पूरी तरह से लागू करने की दिशा में उठाए जाने वाले कदम हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे नारी सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करार दिया है।

पीएम मोदी का संकल्प प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया पर इस सत्र को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा, हमारी माताओं-बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है। हम इसी भावना के साथ शासन में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने के लिए दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं।

क्या है नारी शक्ति वंदन अधिनियम? यह कानून लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करता है। 27 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद, 2023 में इसे 106वां संविधान संशोधन अधिनियम के रूप में पारित किया गया था। इस विधेयक का उद्देश्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर नीति-निर्माण में संतुलन लाना है।

कानून से जुड़े 10 प्रमुख बिंदु

  1. संवैधानिक दर्जा: इसे 106वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2023 का नाम दिया गया है।
  2. आरक्षण का दायरा: लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित होंगी।
  3. लागू करने की प्रक्रिया: यह कानून तुरंत प्रभावी नहीं होगा। इसके लिए नई जनगणना और परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया पूरी होना अनिवार्य है।
  4. SC/ST का अधिकार: अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी महिलाओं के लिए कोटा सुनिश्चित किया गया है।
  5. रोटेशन प्रणाली: आरक्षित सीटें हर चुनाव में रोटेशन के आधार पर बदलेंगी, ताकि अधिक से अधिक क्षेत्रों की महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिले।
  6. समय सीमा: यह आरक्षण व्यवस्था फिलहाल 15 वर्षों के लिए लागू की गई है, जिसे भविष्य में आगे बढ़ाया जा सकता है।
  7. 27 साल का सफर: यह विधेयक पहली बार 1996 में संसद में पेश किया गया था, लेकिन आम सहमति न बनने के कारण यह वर्षों तक लंबित रहा।
  8. राजनीतिक लक्ष्य: इसका मुख्य उद्देश्य निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ाकर लोकतंत्र को समावेशी बनाना है।
  9. संभावित शुरुआत: विशेषज्ञों का मानना है कि यह आरक्षण संभवतः 2029 के आम चुनावों से प्रभाव में आ सकता है।
  10. संवैधानिक चुनौती: सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती सदन में मौजूद सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत हासिल करना है ताकि इससे संबंधित संवैधानिक संशोधनों को सुचारू रूप से लागू किया जा सके।

विपक्ष का रुख और विवाद जहाँ सरकार इसे ऐतिहासिक बता रही है, वहीं विपक्ष ने परिसीमन और जनगणना के मुद्दे पर असहमति जताई है। कुछ विपक्षी दलों का आरोप है कि परिसीमन की प्रक्रिया और सीटों के बंटवारे में उत्तर और दक्षिण भारत के बीच असंतुलन हो सकता है, जिस पर संसद में तीखी बहस देखने को मिल सकती है।

अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार इस सत्र में सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर लाकर इस कानून के क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त कर पाएगी।

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