केंद्र सरकार द्वारा महिला आरक्षण अधिनियम को 2029 से पहले लागू करने की कवायद के बीच, समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपना रुख बदल लिया है। संसद के विशेष सत्र की शुरुआत के साथ ही सपा ने बिल का विरोध करने का ऐलान कर दिया है।
रामगोपाल यादव का कड़ा रुख सपा सांसद रामगोपाल यादव ने बिल के मौजूदा स्वरूप पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पहले ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, लेकिन जिस तरह से सरकार इसे अब पेश कर रही है, वह उनकी बदनीयती को दर्शाता है। उन्होंने साफ किया कि पार्टी इस संशोधन का विरोध करेगी।
डिंपल यादव का स्टैंड और मांग इससे पहले मैनपुरी में सपा सांसद डिंपल यादव ने बिल का सैद्धांतिक समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि सपा महिला आरक्षण के पक्ष में है, लेकिन उनकी मुख्य शर्त यह है कि इसमें ओबीसी (अन्य पिछड़ी जाति) की महिलाओं के लिए कोटा सुनिश्चित किया जाए। डिंपल यादव ने स्पष्ट किया था कि जातिगत जनगणना के बिना यह आरक्षण अधूरा है।
2029 के चुनावों पर नजर सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक में इस संशोधन विधेयक को मंजूरी दी गई है। सरकार का लक्ष्य इसे 2029 के आम चुनावों से पहले प्रभावी बनाना है। इसी उद्देश्य के लिए गुरुवार से संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है।
सियासी गलियारों में गर्माहट महिला आरक्षण विधेयक को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। एक ओर सरकार इसे ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष के भीतर भी इसे लेकर राय बंटी हुई है। सपा का विरोध विपक्ष की एकजुटता पर सवाल खड़े कर सकता है। वहीं, बिल पर धार्मिक टिप्पणी भी सामने आई है, जिसमें मुस्लिम महिलाओं की भूमिका को लेकर बहस छिड़ गई है, जिससे यह मुद्दा और अधिक जटिल हो गया है।
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— ABP News (@ABPNews) April 16, 2026
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