मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई 21 घंटे की हाई-प्रोफाइल शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अपनी टीम के साथ वापस रवाना हो चुके हैं, जिससे क्षेत्र में युद्ध के बादल और गहरे हो गए हैं।
बातचीत के बाद जेडी वेंस ने सख्त लहजे में कहा कि समझौता न होना ईरान के लिए ज्यादा नुकसानदेह है, वहीं ईरान ने अमेरिकी शर्तों को गैरकानूनी और अत्यधिक करार दिया है। आइए जानते हैं वो 5 प्रमुख मुद्दे, जिनकी वजह से यह वार्ता विफल रही।
दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दोनों देशों की रार खत्म नहीं हुई। अमेरिका चाहता है कि यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पूरी तरह खुला रहे, जबकि ईरान इसे अपना रणनीतिक हथियार मानता है। ईरान इस पर अपना नियंत्रण छोड़ने को राजी नहीं है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा का संकट बरकरार है।
अमेरिका ने ईरान से अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने या खत्म करने की मांग की। दूसरी ओर, ईरान इसे अपना वैध अधिकार बताते हुए शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा का तर्क दे रहा है। आपसी अविश्वास इतना गहरा है कि अमेरिका को ईरान के किसी भी वादे पर भरोसा नहीं है।
ईरान ने मांग की कि उस पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध तुरंत हटाए जाएं और उसे आर्थिक नुकसान का मुआवजा मिले। अमेरिका ने शर्त रखी कि राहत तभी मिलेगी जब ईरान अपनी क्षेत्रीय गतिविधियों पर ठोस आश्वासन देगा। पहले कौन के इस फेर ने वार्ता को पूरी तरह ठप कर दिया।
बातचीत के अंतिम चरण में अमेरिका ने एक फाइनल ऑफर पेश किया। हालांकि इसका विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक नहीं है, लेकिन संकेत साफ हैं कि इसमें ईरान को अपनी सैन्य और परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर भारी कटौती करनी थी। ईरान द्वारा इसे न स्वीकारना इस बात का संकेत है कि दोनों पक्ष अभी बहुत दूर हैं।
पाकिस्तान ने होर्मुज में संयुक्त गश्त (Joint Patrol) का एक बीच का रास्ता सुझाया था। अमेरिका को इसमें पर्याप्त सुरक्षा गारंटी नहीं दिखी, तो ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला करार दिया। इस तरह कूटनीतिक मध्यस्थता का यह प्रयास भी विफल रहा।
इस्लामाबाद वार्ता का विफल होना दुनिया के लिए खतरे की घंटी है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सैन्य कार्रवाई जारी रखने की चेतावनी दी है, वहीं अमेरिकी सेना ने होर्मुज में ईरान द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाने का अभियान शुरू कर दिया है।
अब स्थिति दो रास्तों पर खड़ी है: या तो ईरान अमेरिका के अंतिम प्रस्ताव को मानकर झुक जाए, या फिर क्षेत्र एक बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़े। फिलहाल, कूटनीति के दरवाजे खुले तो हैं, लेकिन उन पर ताला लगने की नौबत आ चुकी है।
#WATCH | US-Iran peace talks | Islamabad, Pakistan: US Vice President JD Vance says, ...The bad news is that we have not reached an agreement. I think that is bad news for Iran much more than it s bad news for the USA. So, we go back to the US having not come to an… pic.twitter.com/jWHpJYemYz
— ANI (@ANI) April 12, 2026
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