गुवाहाटी: असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान संपन्न होने के बाद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का पूरा ध्यान राजनीति से हटकर मंदिरों की ओर केंद्रित हो गया है। चुनाव के दिन कामाख्या देवी के दर्शन से शुरू हुआ यह सिलसिला अब राजस्थान के सालासर बालाजी और झारखंड के बाबा बैद्यनाथ मंदिर तक पहुंच चुका है।
आस्था या बेचैनी? हिमंता के लगातार मंदिर दौरे पर असम की सियासत दो धड़ो में बंटी है। भाजपा समर्थकों का कहना है कि यह मुख्यमंत्री का मां कामाख्या के प्रति अटूट विश्वास और आभार प्रकट करने का तरीका है। वहीं, विपक्षी दल इसे हार के डर के रूप में देख रहे हैं। विपक्ष का तर्क है कि 84.42% का रिकॉर्ड मतदान सत्ता विरोधी लहर का संकेत है, जिससे सीएम का आत्मविश्वास डगमगा गया है।
शतक का दावा और विपक्ष का पलटवार हिमंता बिस्वा सरमा ने पूरे आत्मविश्वास के साथ दावा किया है कि एनडीए गठबंधन राज्य की 126 में से 90 से 100 सीटें जीतेगा। इस पर कांग्रेस नेता गौरव गोगोई सहित विपक्षी दलों ने इसे मुख्यमंत्री का अहंकार करार दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुकाबला लाभार्थी योजनाओं और सत्ता विरोधी लहर के बीच एक कांटे की टक्कर जैसा है।
बंगाल चुनाव से दूरी का रहस्य भाजपा के प्रमुख स्टार प्रचारक होने के बावजूद हिमंता का बंगाल चुनाव में कम सक्रिय होना चर्चा का विषय है। जानकारों का कहना है कि हिमंता फिलहाल पूरी तरह से असम की 126 सीटों पर अपना ध्यान केंद्रित रखना चाहते हैं। उन्होंने खुद स्वीकार किया है कि वे उन क्षेत्रों में प्रचार से बच रहे हैं जहां प्रवासी मुस्लिम आबादी का प्रभाव अधिक है, ताकि वे अपनी स्वदेशी और राष्ट्रवादी छवि को बरकरार रख सकें।
4 मई का इंतजार हिमंता के करीबियों का कहना है कि चुनावी नतीजों से पहले भगवान का आशीर्वाद लेना उनकी पुरानी परंपरा है। बहरहाल, ईवीएम में कैद जनता का फैसला 4 मई को खुलेगा। यदि हिमंता का 90 से 100 सीटों का दावा सच साबित होता है, तो यह उत्तर-पूर्व में भाजपा की अब तक की सबसे बड़ी जीत होगी। अब सभी की निगाहें मतगणना के दिन पर टिकी हैं।
#WATCH | Assam CM Himanta Biswa Sarma offers prayers at the Khatu Shyam Mandir in Sikar, Rajasthan
— ANI (@ANI) April 11, 2026
He says, I visit here often. After the elections in Assam concluded, I came here to seek Baba s blessings. The NDA will come to power with a massive majority; I believe that out… pic.twitter.com/G95Vi7iyow
असम चुनाव: मतदान के बाद मंदिर-मंदिर क्यों दौड़ रहे हिमंता? क्या यह आस्था है या हार का डर ?
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