बिहार का अगला CM कौन? चिराग पासवान ने तोड़ी चुप्पी, नई सरकार का ब्लूप्रिंट आया सामने
News Image

बिहार की सियासत में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। हर दिन नए कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर पटना में सत्ता की कमान किसके हाथ में होगी। इस दौड़ में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान का नाम भी चर्चा में था, लेकिन अब खुद चिराग ने स्थिति साफ कर दी है।

चिराग पासवान ने खुद को रेस से किया बाहर चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री बनने की तमाम अटकलों पर पूर्ण विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे सीएम पद की दौड़ में नहीं हैं। चिराग ने सरकार के भविष्य को लेकर बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि नई सरकार में केवल नेतृत्व बदलेगा, जबकि सरकार का स्वरूप और उसका ढांचा पहले जैसा ही बना रहेगा।

कैबिनेट में होगा बदलाव? चिराग पासवान के अनुसार, नई सरकार में मुख्यमंत्री का चेहरा जरूर बदलेगा, लेकिन मंत्रिमंडल के स्वरूप में कोई बड़ा उलटफेर नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने यह संकेत जरूर दिए हैं कि नई कैबिनेट में कुछ पुराने मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और उनकी जगह नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है।

पार्टी के अंदर क्या है माहौल? भले ही चिराग ने खुद को दावेदारी से अलग कर लिया हो, लेकिन उनकी पार्टी (LJP-R) के भीतर एक बड़ा धड़ा उन्हें ही सीएम के रूप में देखना चाहता है। पार्टी के कई विधायक और नेता खुलकर कह रहे हैं कि युवाओं में लोकप्रियता के कारण चिराग ही मुख्यमंत्री पद के सबसे उपयुक्त उम्मीदवार हैं। हालांकि, पार्टी नेताओं का यह भी मानना है कि अंतिम फैसला एनडीए के शीर्ष नेतृत्व और बीजेपी के साथ मंथन के बाद ही होगा।

पटना में बैठकों का दौर तेज सीएम आवास पर हाल ही में जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और मंत्री विजय कुमार चौधरी की दो घंटे तक चली मैराथन बैठक ने हलचल बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में नए मंत्रिमंडल में युवा चेहरों को शामिल करने पर विशेष जोर दिया गया है।

बीजेपी की सक्रियता बढ़ी इस पूरी कवायद में भारतीय जनता पार्टी भी पूरी तरह सक्रिय मोड में है। पार्टी की एक अहम बैठक पटना में होने वाली है, जिसमें बिहार प्रभारी विनोद तावड़े शामिल होंगे। इस बैठक में न केवल नए सीएम के चेहरे पर सहमति बनाने की कोशिश होगी, बल्कि सरकार गठन की पूरी रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। एनडीए के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसा सर्वसम्मत नाम चुनने की है, जिसे घटक दलों और जनता का पूरा समर्थन हासिल हो।

*

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

अमेरिकी तेल की ओर दौड़ पड़े खाली टैंकर: क्या होर्मुज संकट का तोड़ निकाल लिया ट्रंप ने?

Story 1

बंदरों की अद्भुत टीम स्पिरिट : खुद का शरीर बना लिया पुल, वायरल हुआ वीडियो

Story 1

पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान की महा-शांति वार्ता : ट्रंप की धमकी और कड़ी सुरक्षा के बीच टली बैठक

Story 1

कर्नल पुरोहित के प्रमोशन पर घमासान: क्या देश संविधान से चलेगा या मनमानी से?

Story 1

मथुरा: यमुना में नाव हादसा, पंटून पुल से टकराने के बाद पलटी नाव; 10 लोगों की दर्दनाक मौत

Story 1

CUET PG 2026: आंसर की के इंतजार में बैठे छात्रों को NTA का धुरंधर अंदाज, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

Story 1

वंदे मातरम पर सियासी घमासान: सीएम मोहन यादव का कांग्रेस पर तीखा हमला, कहा- राष्ट्रीय गीत का अपमान बर्दाश्त नहीं

Story 1

संसद में दिखी पॉलिटिकल केमिस्ट्री : पीएम मोदी और राहुल गांधी की मुलाकात ने खींचा सबका ध्यान

Story 1

नासिक आईटी कंपनी में कॉर्पोरेट जिहाद : जबरन नमाज और यौन शोषण का काला सच, अंडरकवर महिला पुलिसकर्मियों ने किया भंडाफोड़

Story 1

PSL में भारी बवाल: गेंदबाज के विवादित एक्शन से तंग आए डेरिल मिचेल, बीच मैदान में हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा