अमेरिकी तेल की ओर दौड़ पड़े खाली टैंकर: क्या होर्मुज संकट का तोड़ निकाल लिया ट्रंप ने?
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय खासे उत्साहित हैं। इसकी वजह है अमेरिकी तट की ओर बढ़ते खाली तेल टैंकरों का एक बड़ा काफिला। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इसे शानदार करार दिया है। आखिर यह पूरा घटनाक्रम वैश्विक तेल बाजार के लिए क्या मायने रखता है?

टैंकरों की कतार और बढ़ती उम्मीदें

ऑयल मार्केट रिसर्चर रोरी जॉनस्टन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक नक्शा साझा करते हुए बताया कि दर्जनों खाली VLCC (Very Large Crude Carriers) अमेरिकी खाड़ी तट की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। इन टैंकरों में से प्रत्येक की क्षमता लगभग 20 लाख बैरल कच्चा तेल ढोने की है। यह हलचल ऐसे समय में हो रही है जब दुनिया भर के बाजारों में तेल की भारी किल्लत महसूस की जा रही है।

होर्मुज का संकट और अमेरिका की रणनीति

यह पूरा घटनाक्रम होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के बीच सामने आया है। ईरान ने हाल ही में इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते की नाकेबंदी कर दी है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई है। दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह ट्रेंड जारी रहा, तो अमेरिका के तेल निर्यात में ऐतिहासिक उछाल देखने को मिल सकता है।

ईरान की दादागिरी नहीं चलेगी

राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के प्रति अपना रुख और कड़ा कर लिया है। ट्रंप का स्पष्ट मानना है कि ईरान सैन्य रूप से कमजोर हो चुका है। उन्होंने दो टूक कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को हर हाल में खोला जाएगा, चाहे ईरान इसके लिए तैयार हो या न हो। ट्रंप ने साफ किया कि अमेरिका तेहरान को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जहाजों से ट्रांजिट शुल्क वसूलने की अनुमति कभी नहीं देगा।

आज पाकिस्तान में अहम शांति वार्ता

तनाव के बीच आज पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च स्तरीय शांति वार्ता होनी है। ईरान का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं, वहीं अमेरिकी टीम का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे। इस वार्ता में जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ भी शामिल होंगे।

होर्मुज का रणनीतिक महत्व

फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच का यह संकरा रास्ता दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ है। 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान द्वारा की गई नाकेबंदी ने वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें आज होने वाली शांति वार्ता पर टिकी हैं कि क्या इस संकट का कोई कूटनीतिक हल निकलता है या फिर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी।

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