सबसे छोटे ताबूत सबसे भारी : मीनाब की 168 मासूम बेटियों की खामोश अंतिम विदाई
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सुबह की चाय और दिल दहला देने वाली तस्वीर आज सुबह की शुरुआत सामान्य थी, लेकिन मोबाइल स्क्रीन पर दिखी एक तस्वीर ने रूह कंपा दी। विमान की नीली सीटों पर मुस्कुराती हुई स्कूली लड़कियों की तस्वीरें किसी के भी कलेजे को चीरने के लिए काफी थीं। हिजाब पहने एक छोटी बच्ची, पीले कुर्ते में एक मासूम लड़का और उनके बगल में पड़ा सफेद गुलाब—ये दृश्य किसी भी माता-पिता को यह सोचने पर मजबूर कर देता है कि कल को उनके अपने बच्चों का क्या होगा।

सन्नाटे में लिपटी वो उड़ान आम तौर पर हवाई जहाज में शोर और हलचल होती है, लेकिन ईरान से इस्लामाबाद आ रही इस उड़ान में एक भयावह सन्नाटा है। यह उन 168 मासूम बच्चियों की यादों का सन्नाटा है, जिनकी हंसी 28 फरवरी को मीनाब के गर्ल्स स्कूल पर हुए कायरतापूर्ण हमले में हमेशा के लिए खत्म हो गई। यह विमान सिर्फ एक सफर नहीं, बल्कि उन टूटे हुए सपनों का एक उड़ता हुआ स्मारक है।

सत्ता की राजनीति और बेगुनाहों का लहू इस हमले की जिम्मेदारी लेने के लिए न डोनाल्ड ट्रंप तैयार हैं और न ही बेंजामिन नेतन्याहू। एक खेमा ईरानी सभ्यता को मिटाने की धमकी देता है, तो दूसरा गाजा जैसे इलाकों में कब्रें खोदने के लिए कुख्यात है। राजनीति के इस खेल में ये निशाने नहीं, बल्कि किसी की लाड़लियां थीं। इन्हें बारिश पसंद थी, किताबें प्यारी थीं और माता-पिता ने इनमें सुनहरे भविष्य के सपने बुने थे, जिन्हें चंद सेकंडों में राख कर दिया गया।

इंसानियत का मरता हुआ ज़मीर ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बघेर कालिबाफ ने अपनी उड़ान की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, इस उड़ान में मेरे साथी। यह संदेश एक कड़वा सच बयां करता है—जो चले गए, वे कभी पीछे नहीं छूटते। वे हमारी सोच और हमारे भविष्य का हिस्सा बनकर हमसे एक ही सवाल पूछते हैं—क्यों? जब किसी स्कूल पर हमला होता है, तो सिर्फ इमारत नहीं गिरती, बल्कि पूरी इंसानियत का भविष्य मर जाता है।

एक ऐसी दुनिया का इंतज़ार ईरान में गिरीं उन बेटियों की लाशें सिर्फ एक देश का नुकसान नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया के ज़मीर पर एक ऐसा दाग है जिसे मिटाया नहीं जा सकता। यह घटना हमें याद दिलाती है कि जब तक हमारे बच्चे अपनी क्लास में सुरक्षित नहीं हैं, तब तक हमारी तमाम तरक्की और सभ्यता खोखली है। #Minab168 की ये यादें हमें उस दुनिया की ओर ले जाने के लिए प्रेरित करें, जहां किसी बच्चे को जंग का शिकार न होना पड़े। क्योंकि जैसा कि कहा जाता है, सबसे छोटे ताबूत ही दुनिया में सबसे भारी होते हैं।

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