ईरान-अमेरिका तनाव ने खोला दुनिया का सच: क्या भारत बन चुका है ग्लोबल कनेक्टिंग पावर ?
News Image

ईरान और अमेरिका के बीच हालिया संघर्ष ने न केवल वैश्विक भू-राजनीति को बदला है, बल्कि उसे पूरी तरह बेनकाब भी कर दिया है। आज की दुनिया अब पुरानी सुपरपावर बनाम सुपरपावर की लकीर पर नहीं चल रही है। इस बदलते दौर में सबसे बड़ी ताकत सैन्य शक्ति नहीं, बल्कि जुड़ाव (Connectivity) है।

इज़रायली रणनीतिक विश्लेषक शेय गैल का मानना है कि असली ताकत उस देश के पास है, जो हर पक्ष से संवाद बनाए रखने का माद्दा रखता है। इस कसौटी पर भारत आज सबसे आगे खड़ा है।

संतुलन नहीं, ढांचा बना रहा भारत

अक्सर विश्लेषक भारत की विदेश नीति को संतुलन (Balance) की संज्ञा देते हैं, लेकिन यह पूरी सच्चाई नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत संतुलन के बजाय एक मजबूत ढांचा तैयार कर रहा है। संतुलन कभी भी टूट सकता है, लेकिन ढांचा स्थायी होता है।

भारत ने खुद को किसी एक खेमे में कैद करने के बजाय एक ऐसा वैश्विक नेटवर्क बुना है, जहाँ हर देश किसी न किसी रूप में उससे जुड़ा है।

चाबहार से खाड़ी तक: भारत की पहुंच

इस रणनीति की झलक चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट में साफ दिखती है। यह भारत के लिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंचने का एक वैकल्पिक और सुरक्षित रास्ता है। अमेरिकी दबाव के बावजूद भारत ने अपने हितों के आधार पर इस प्रोजेक्ट को जारी रखा।

वहीं, खाड़ी देशों (सऊदी अरब, यूएई) के लिए भारत केवल एक व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि एक इंश्योरेंस की तरह है। ऊर्जा का बड़ा ग्राहक, निवेशकों का केंद्र और श्रम शक्ति का स्रोत होने के नाते भारत इन देशों के लिए अपरिहार्य (Indispensable) बन चुका है।

कनेक्टर पावर : एक नई श्रेणी

भारत अभी तक पारंपरिक अर्थों में सुपरपावर नहीं है, फिर भी वह एक नई श्रेणी में फिट बैठता है: कनेक्टर पावर । इसकी मुख्य विशेषताएं हैं:

जोखिम और अवसर

इस नीति के अपने जोखिम भी हैं। भारत किसी भी संघर्ष में पूरी तरह किसी एक पक्ष के साथ खड़ा नहीं होता, इसलिए वह हर युद्ध को रोकने की क्षमता नहीं रखता। हालांकि, उसकी रणनीति का लक्ष्य हर समीकरण में खुद को इतना जरूरी बना लेना है कि उसके बिना कोई भी समाधान संभव न हो।

ईरान-अमेरिका टकराव के दौरान जहां कई देश किसी एक पक्ष के साथ खड़े दिखे, वहीं भारत ने हर तरफ अपना संवाद खुला रखा। इसी कारण उसे किसी को सफाई देने की जरूरत नहीं पड़ी।

वैश्विक व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा

आने वाले समय में दुनिया दो हिस्सों में बंट सकती है: एक वे देश जो जुड़े हुए हैं और दूसरे जो अलग-थलग पड़ गए हैं। भारत पहले समूह का नेतृत्व करता दिख रहा है। वह न तो किसी पर हावी होना चाहता है और न ही सिमटना चाहता है।

भारत आज महज एक देश नहीं, बल्कि एक कनेक्टिंग मैकेनिज्म बन चुका है। यह वह भूमिका है जिसे दुनिया ने भारत को सौंपा नहीं, बल्कि हालात ने खुद तय कर दिया है। यही आज के समय में भारत की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है।

कुछ अन्य वेब स्टोरीज

Story 1

डियर वैभव : विराट कोहली ने युवा सनसनी सूर्यवंशी को दिया खास आशीर्वाद

Story 1

मिनाब स्कूल का दर्द और टूटे वादों का बोझ: अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच तेहरान का खौफनाक संदेश

Story 1

दिल्ली दरबार में भगवंत मान: पंजाब के 9000 करोड़ के बकाया और किसानों के हक के लिए केंद्र से सीधी बात

Story 1

WWE SmackDown: रैंडी ऑर्टन और पैट मैकफी ने कोडी रोड्स का किया बुरा हाल, मेन इवेंट में मचा बवाल

Story 1

चांद के पीछे वो 40 मिनट: जब दुनिया से कट गया था संपर्क और थम गई थी सबकी सांसें

Story 1

मेट्रो स्टेशन पर पत्नी का पति पर फूटा गुस्सा: घर मैं चला रही हूं, तुम क्या कर रहे हो?

Story 1

3 ट्रिलियन डॉलर का प्राइवेट मार्केट डूबा तो आएगा 2008 जैसा महासंकट, ईरान-अमेरिका में शांति भी नहीं बचा पाएगी!

Story 1

जंग के साये में सिगेह : ईरान के पुलिस अफसर ने केवल एक महीने के लिए क्यों रचाई शादी?

Story 1

मुंबई में जल प्रलय: बांद्रा की सड़कों पर बहा लाखों लीटर पानी, इलाके में मचा हाहाकार

Story 1

PSL 2026: मिस्ट्री स्पिनर के एक्शन ने डेरिल मिचेल को किया परेशान, पिच पर हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा