नई दिल्ली: वेस्ट एशिया में पिछले 40 दिनों से जारी तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींव हिला दी है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के खतरे ने दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर खड़ा कर दिया है, जहां से वापसी मुश्किल लग रही है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि मौजूदा वित्तीय अस्थिरता जारी रही, तो दुनिया 2008 से भी भीषण आर्थिक मंदी का सामना कर सकती है।
बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर एंड्रयू बेली ने चेतावनी दी है कि 3 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 250 लाख करोड़ रुपये) का प्राइवेट क्रेडिट मार्केट वर्तमान में एक टाइम बम की तरह है। यह बाजार निजी हेज फंड और कर्जदाताओं द्वारा संचालित होता है, जहाँ नियमों का भारी अभाव है। बेली ने इसकी तुलना 2008 के सब-प्राइम मॉर्गेज संकट से की है, जिसने पूरी दुनिया की बैंकिंग व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया था।
जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डिमन ने इस सिस्टम को कॉकरोच युक्त बताया है, जिसका अर्थ है कि सिस्टम के भीतर ऐसी गहरी खामियां और छिपे हुए घाटे हैं जो अब सामने आ रहे हैं। इस साल की पहली तिमाही में ही निवेशकों ने प्राइवेट क्रेडिट फंड से 20 अरब डॉलर से अधिक की निकासी की कोशिश की है। निवेशकों का यह घटता भरोसा बड़े वित्तीय संस्थानों के लिए तबाही का संकेत है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की प्रमुख क्रिस्टालिना जॉर्जीवा का मानना है कि यदि ईरान और इजरायल के बीच शांति समझौता हो भी जाता है, तब भी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके जख्म गहरे रहेंगे। युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति और बुनियादी ढांचे को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई करना आसान नहीं है। जॉर्जीवा के अनुसार, दुनिया विकास की उस पुरानी रफ्तार पर शायद ही कभी वापस लौट पाए, जहां युद्ध से पहले थी।
दुनिया की नजरें होर्मुज के समुद्री रास्ते पर टिकी हैं, जो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति की जीवन रेखा है। इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट का अर्थ है तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि। आईएमएफ ने चेताया है कि भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों और गरीब अर्थव्यवस्थाओं पर इसकी सबसे भयानक मार पड़ेगी।
दुनिया भर में प्राइवेट लेंडिंग मार्केट में दरारें स्पष्ट दिख रही हैं। कई कंपनियां धोखाधड़ी और घाटे के कारण बंद हो रही हैं। एंड्रयू बेली ने स्वीकार किया कि बाजार की अस्थिरता, प्राइवेट क्रेडिट की समस्याएं और भू-राजनीतिक तनाव मिलकर एक ऐसा ट्रिपल व्हैमी संकट बना रहे हैं, जिससे रातों की नींद उड़ना लाजमी है।
आईएमएफ ने सरकारों को आगाह किया है कि वे ऐसे समय में सब्सिडी और टैक्स कटौती जैसे लुभावने कदमों से बचें, जो आग में घी का काम कर सकते हैं। केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरों के मामले में अब बेहद फूंक-फूंक कर कदम रखने होंगे। दुनिया एक ऐसी अनिश्चितता के दौर में है, जहां भविष्य का परिदृश्य दशकों तक धुंधला रह सकता है।
हॉर्मुज गलियारे से फिर भड़केगी युद्ध की आग?#IranUSCeasefire #StraitofHormuz #IranWar@PankajBofficial pic.twitter.com/EGptx6qtzZ
— News18 India (@News18India) April 10, 2026
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