पूर्व सांसद और तेलंगाना जागृति की संस्थापक के. कविता ने पाकिस्तान द्वारा अपने शीर्ष नेतृत्व के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने पाकिस्तान की इस हरकत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजाक करार दिया है।
क्या है मामला? हाल ही में पाकिस्तानी मीडिया में खबरें आईं कि वहां की नेशनल असेंबली ने एक प्रस्ताव का समर्थन किया है। इस प्रस्ताव में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने की मांग की गई है।
आतंक को पनाह देने वालों को शांति का पुरस्कार? के. कविता ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि जिस देश का रिकॉर्ड आतंकवाद के मामले में पूरी दुनिया में दागदार है, उसका नोबेल जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कार की मांग करना हास्यास्पद है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, पाकिस्तान का यह कदम किसी जोक से कम नहीं है। पहले उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के लिए इसकी मांग की थी, अब अपने नेताओं के लिए तीन पुरस्कार मांग रहे हैं। अगर यही सिलसिला चलता रहा, तो भविष्य में ये हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे खूंखार आतंकवादियों के लिए भी नोबेल की मांग कर देंगे।
आतंकी देश का चेहरा बेनकाब करना जरूरी कविता ने इस मुद्दे को बेहद गंभीर बताया है। उनका कहना है कि इस विषय को हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने भारत के नागरिकों से अपील की है कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की इस बेतुकी मांग का विरोध करें।
उन्होंने कहा, एक भारतीय होने के नाते, दुनिया के सामने इस आतंकवादी देश का असली चेहरा बेनकाब करना हमारा कर्तव्य है। हमें सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर यह सुनिश्चित करना होगा कि पाकिस्तान को नोबेल की सूची में जगह तक न मिले।
भारत की ओर बढ़ता दबाव के. कविता ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान दशकों से भारत में आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। ऐसे में शांति और सद्भाव के प्रतीक नोबेल पुरस्कार से इस देश का जुड़ना पूरी दुनिया के लिए अपमानजनक होगा।
पूर्व सांसद की इस टिप्पणी ने भारत में पाकिस्तान के कथित नोबेल अभियान को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान की इस मांग पर क्या रुख अपनाता है।
Nobel for Hafiz Saeed and Masood Azhar next?
— Kavitha Kalvakuntla (@RaoKavitha) April 10, 2026
A terror state like Pakistan demanding a Nobel for its leaders is laughable. First, they wanted one for Trump; now they demand three for their own. In the future, they might as well demand one for terrorists like Hafiz Saeed and… pic.twitter.com/fN5h91Vsou
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