समय युद्ध का चौथा आयाम: भविष्य के रणक्षेत्र को लेकर CDS अनिल चौहान ने खोला राज
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भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने बेंगलुरु में आयोजित ट्राई-सर्विस सेमिनार रण संवाद में भविष्य के युद्धों को लेकर एक नई और गंभीर चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने आधुनिक युद्धनीति के बदलते स्वरूप और इसके सात आयामों का खाका पेश किया है।

युद्ध और राजनीति का अटूट संबंध जनरल चौहान ने स्पष्ट किया कि युद्ध हमेशा राजनीति के अधीन होता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक सरकारें अक्सर जनमत की बंधक होती हैं, जिसके कारण युद्ध को संचालित करना एक बड़ी जिम्मेदारी बन जाता है। उनके अनुसार, जब युद्ध भौतिक सीमाओं से परे एक अलग वास्तविकता में लड़ा जाता है, तो उसे समझना और नियंत्रित करना और भी कठिन हो जाता है।

समय: युद्ध का चौथा नया आयाम इतिहास का जिक्र करते हुए CDS ने बताया कि शुरुआत में युद्ध द्वि-आयामी (जमीन और समुद्र) था, जिसे विमानों के आविष्कार ने तीसरा आयाम दिया। अब हम युद्ध के चौथे आयाम यानी समय (Time) में प्रवेश कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि आज के युद्धक्षेत्र का दायरा इतना विस्तृत हो गया है कि अलग-अलग घटनाएं अलग-अलग गति से हो रही हैं। एक ही युद्धक्षेत्र में संकुचित और विस्तृत समय को समझना ही अब बड़ी चुनौती है।

पांचवां, छठा और सातवां आयाम: साइबर से संज्ञानात्मक युद्ध तक भविष्य की रणनीतियों पर बोलते हुए जनरल चौहान ने कहा कि साइबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम युद्ध के पांचवें और छठे आयाम के रूप में उभर रहे हैं। वहीं, कॉग्निटिव वॉरफेयर (संज्ञानात्मक युद्ध) सातवां आयाम हो सकता है। हम वर्तमान में न केवल मल्टी-डोमेन , बल्कि मल्टी-डायमेंशनल युद्ध के युग की ओर बढ़ रहे हैं।

मकसद विनाश नहीं, दुश्मन की कार्यक्षमता को ठप करना आधुनिक युद्ध के अगले चरण के बारे में उन्होंने कहा कि अब काइनेटिक को नॉन-काइनेटिक और मानव-युक्त को मानव-रहित प्रणालियों के साथ मिलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य केवल दुश्मन का विनाश करना नहीं, बल्कि उसकी कार्यक्षमता को पूरी तरह से ठप करना है। इसमें छल, भ्रम और तकनीकी बढ़त का इस्तेमाल करके दुश्मन को पंगु बनाया जाता है, ताकि वह आगे लड़ने की स्थिति में ही न रहे।

निष्कर्ष CDS अनिल चौहान का यह संबोधन बताता है कि भारतीय सेना अब भविष्य के उन युद्धों के लिए खुद को तैयार कर रही है, जहां जीत केवल हथियारों के दम पर नहीं, बल्कि समय और तकनीक के सही तालमेल से हासिल होगी। यह रण संवाद भारतीय रक्षा तैयारियों की नई दिशा और भविष्य की जटिलताओं को रेखांकित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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