उज्जैन में 19 घंटे से जिंदगी की जंग: बोरवेल में फंसा 3 साल का मासूम, रेस्क्यू में चट्टानें बनीं सबसे बड़ी बाधा
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उज्जैन के बड़नगर तहसील स्थित झलारिया गांव में दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। गुरुवार शाम को खेलते-खेलते एक 3 साल का मासूम बच्चा भागीरथ देवासी खुले बोरवेल में जा गिरा। घटना को 19 घंटे से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है।

हादसे का मंजर: खेलते-खेलते काल के गाल में समाया मासूम घटना गुरुवार शाम करीब साढ़े सात बजे की है। राजस्थान के पाली निवासी पूसाराम देवासी का परिवार भेड़ चराने के लिए झलारिया गांव में रुका हुआ था। मासूम भागीरथ दीवार के पास खेल रहा था, तभी उसने बोरवेल का ढक्कन हटाया और पैर फिसलने से वह नीचे गिर गया। मां ने उसे गिरते हुए देखा, लेकिन जब तक वह दौड़कर पहुंचती, बच्चा 200 फीट गहरे बोरवेल में जा चुका था।

प्रशासन की पूरी टीम मुस्तैद हादसे की सूचना मिलते ही जिला कलेक्टर रौशन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा घटनास्थल पर पहुंच गए। पिछले 19 घंटों से वे खुद ऑपरेशन की निगरानी कर रहे हैं। NDRF और SDRF की टीमें मिलकर बच्चे को बचाने की हर संभव कोशिश कर रही हैं।

रेस्क्यू में क्यों हो रही देरी? रेस्क्यू टीम ने पहले रस्सियों और रोप रिंग की मदद से बच्चे तक पहुँचने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इसके बाद बोरवेल के समानांतर दूसरी सुरंग खोदने का निर्णय लिया गया।

पांच पोकलेन मशीनों की मदद से खुदाई शुरू की गई, लेकिन 40 फीट की गहराई पर पहुँचते ही कठोर चट्टानें आ गईं। इन चट्टानों के कारण काम बीच में ही रुक गया। अब भोपाल से विशेष हैमर मशीन मंगाई गई है ताकि पत्थर तोड़कर खुदाई जारी रखी जा सके।

45 फीट की गहराई पर फंसा है बच्चा मौजूदा स्थिति के अनुसार, बच्चा अभी बोरवेल में 45 फीट की गहराई पर अटका हुआ है। उसे सुरक्षित रखने के लिए पाइप के जरिए बोरवेल के अंदर ऑक्सीजन की लगातार सप्लाई की जा रही है। विशेषज्ञ कैमरे के जरिए बच्चे की हर हरकत पर नजर बनाए हुए हैं।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल बेटे को बचाने की जंग के बीच मासूम की मां जत्तू बाई और पिता पूसाराम का हाल बेहाल है। मां की आंखें पथरा गई हैं और वह लगातार अपने बच्चे की सलामती की दुआ मांग रही है। पूरा गांव इस समय स्तब्ध है और हर कोई ईश्वर से बच्चे के सुरक्षित बाहर आने की प्रार्थना कर रहा है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक मासूम सुरक्षित बाहर नहीं आ जाता, तब तक रेस्क्यू का काम नहीं रुकेगा। हर कदम बेहद सावधानी से उठाया जा रहा है ताकि बच्चे तक पहुंचने में कोई जोखिम न हो।

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