ऑपरेशन सिंदूर : नमाज के वक्त हमला न करने पर बोले आर्मी चीफ, कहा- सबका मालिक एक
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पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकवादी हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए सीमा पार आतंकियों के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया। इस अभियान की सफलता के साथ-साथ सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारतीय सेना की उस मानवीय शक्ति का भी जिक्र किया, जो युद्ध के मैदान में भी इबादत का सम्मान करती है।

दुश्मन की इबादत का सम्मान एक इंटरव्यू में सेना प्रमुख ने खुलासा किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने अत्यधिक संयम और मानवीय मूल्यों का परिचय दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेना ने यह सुनिश्चित किया कि किसी भी हमले का समय नमाज का वक्त न हो।

जनरल द्विवेदी ने कहा, अगर आतंकी कैंप में लोग नमाज पढ़ रहे होते थे, तो हम हमला टाल देते थे। हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि सबका मालिक एक है। उन्होंने जोर दिया कि युद्ध की स्थिति में भी भारतीय सेना ने दुश्मनों की धार्मिक भावनाओं और इबादत का पूरा सम्मान किया।

युद्ध के बदलते स्वरूप को समझना रण संवाद मंच को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने ऑपरेशन सिंदूर को भविष्य के युद्धों के लिए एक अध्ययन का विषय बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक सैन्य अभियान अब केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये साइबर, इलेक्ट्रॉनिक और समन्वित कार्रवाई का मिश्रण हैं।

उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में जमीनी खुफिया नेटवर्क, साइबर वॉरफेयर और वायु सेना की संयुक्त कार्रवाई का बेहतरीन तालमेल देखने को मिला। किसी भी एक क्षेत्र ने इसे अंजाम नहीं दिया, बल्कि सभी अंगों ने मिलकर इसे सफल बनाया।

हाइब्रिड वॉर की नई चुनौतियां जनरल द्विवेदी ने हाइब्रिड या ग्रे-ज़ोन युद्ध के बढ़ते खतरों के प्रति आगाह किया। उन्होंने कहा कि आज का युद्ध पारंपरिक सैन्य सीमाओं से ऊपर उठ चुका है, जहां दुश्मन कमजोरियों का फायदा उठाने की फिराक में रहता है। इसके लिए सेना ने 15 प्रतिशत ध्यान दुष्प्रचार (प्रोपेगेंडा) अभियानों से निपटने पर केंद्रित किया है।

एकीकृत युद्ध का नया युग थलसेना प्रमुख ने बताया कि अब सेना के अलग-अलग हिस्से समानांतर काम नहीं करेंगे, बल्कि वे एक एकीकृत इकाई की तरह लगातार आपसी तालमेल में रहेंगे। इसमें ड्रोन इकाइयों, रुद्र ब्रिगेड और साइबर ऑपरेशन नोड्स का एकीकरण बहुत महत्वपूर्ण है।

आर्मी चीफ के ये बयान न केवल भारतीय सेना की मारक क्षमता को दर्शाते हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट करते हैं कि भारतीय सेना सामरिक ताकत के साथ-साथ नैतिक मूल्यों के प्रति भी उतनी ही अडिग है।

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