पंजाब की सियासत में भूचाल: मंत्री और विधायक का ऑडियो वायरल, कारोबारियों को धमकाने का आरोप
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पंजाब की राजनीति में एक कथित ऑडियो क्लिप ने सियासी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस वायरल ऑडियो में पंजाब सरकार के मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल के नाम सामने आ रहे हैं, जिसके बाद विपक्ष ने आम आदमी पार्टी की सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

क्या है मामला? सोशल मीडिया पर वायरल हुई करीब 5 मिनट 2 सेकंड की यह ऑडियो रिकॉर्डिंग लुधियाना और चंडीगढ़ में चर्चा का विषय बनी हुई है। इसमें कथित तौर पर मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां और एक फैक्ट्री मालिक मलकीत सिंह के बीच तीखी बहस हो रही है। बातचीत का मुख्य केंद्र दो साल पुरानी एक ट्रॉली का भुगतान न करना बताया जा रहा है।

अपशब्दों और धमकियों के गंभीर आरोप फैक्ट्री मालिक मलकीत सिंह का आरोप है कि भुगतान न करने के साथ-साथ मंत्री ने उनकी फैक्ट्री को बंद करवाने के लिए सरकारी विभागों का इस्तेमाल किया और उन पर दबाव बनाया। ऑडियो में मंत्री द्वारा कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और कारोबारी को धमकाने के दावे किए जा रहे हैं।

बीच-बचाव की कोशिश और तीखी बहस ऑडियो में विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल भी सुनाई देते हैं। वे दोनों पक्षों के बीच सुलह कराने की कोशिश करते हुए ट्रॉली के बिल का भुगतान करने की बात कहते हैं। हालांकि, मामला शांत होने के बजाय और बिगड़ गया। कारोबारी ने यहां तक आरोप लगाया कि उन्हें गैंगस्टर संरक्षण जैसे गंभीर मामलों में फंसाने की कोशिश की जा रही है।

विपक्ष का तीखा हमला केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इस ऑडियो को अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर करते हुए सरकार पर निशाना साधा है। बिट्टू ने कहा कि एक तरफ सरकार निवेश के दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ उनके अपने मंत्री कारोबारियों को सरेआम अपमानित और धमका रहे हैं। कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा ने भी मामले को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री से सख्त कार्रवाई की मांग की है।

मंत्री और विधायक की चुप्पी इस विवाद पर फिलहाल मंत्री हरदीप सिंह मुंडियां और विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मीडिया द्वारा संपर्क करने पर विधायक का फोन बंद पाया गया और मंत्री ने भी संदेशों का कोई जवाब नहीं दिया है।

हालांकि मंत्री ने पूर्व में इन आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए इसे केवल जनसमस्याओं को सुनने की प्रक्रिया बताया है, लेकिन इस ऑडियो क्लिप ने राज्य में निवेश के माहौल और सत्ता के दुरुपयोग की बहस को एक बार फिर गर्मा दिया है।

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