केरल के त्रिशूर से लोकतंत्र की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो हक के लिए लड़ने वालों के लिए मिसाल बन गई है। एक युवा मां ने सिर्फ इसलिए हार नहीं मानी क्योंकि अधिकारियों ने उनकी चोटिल उंगली का बहाना बनाकर उन्हें मतदान से वंचित कर दिया था।
क्या था मामला?
अक्षया पी. संतोष गुरुवार को केरल विधानसभा चुनाव के दौरान दोपहर करीब 1:30 बजे कुरकनचेरी के मतदान केंद्र पहुंची थीं। वहां मौजूद प्रिसाइडिंग ऑफिसर ने उन्हें वोट डालने से रोक दिया।
वजह यह थी कि अक्षया की बाईं तर्जनी उंगली पर पट्टी बंधी थी, जिस पर आमतौर पर चुनावी स्याही लगाई जाती है। अक्षया ने बताया कि चार दिन पहले मिक्सर में उनकी उंगली बुरी तरह जख्मी हो गई थी और उसमें 15 टांके लगे हैं। उन्होंने मेडिकल सर्टिफिकेट भी दिखाया, लेकिन अधिकारी अपनी जिद पर अड़े रहे।
भूखे पेट घंटों तक संघर्ष
अधिकारियों ने अक्षया से कहा कि या तो पट्टी हटाओ या वोट देने का इरादा छोड़ दो। अक्षया ने इसे अपने लोकतांत्रिक अधिकार का हनन माना और वहीं मतदान केंद्र के बाहर विरोध में बैठ गईं।
दोपहर 1:30 बजे से शुरू हुआ यह संघर्ष शाम के 5 बजे तक जारी रहा। अक्षया बिना कुछ खाए-पिए अपनी बात पर डटी रहीं। उनका कहना था, मैं बिना वोट डाले यहां से नहीं हिलूंगी।
CEO दफ्तर का दखल
मामला तूल पकड़ने लगा और सोशल मीडिया के जरिए केरल के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) तक पहुंच गया। बढ़ते दबाव को देखते हुए CEO कार्यालय ने दखल दिया और एक लिखित आदेश जारी कर अक्षया को वोट डालने की विशेष अनुमति दी।
आखिरकार मिली जीत
शाम के करीब 6:15 बजे, घंटों की जद्दोजहद के बाद अक्षया ने आखिरकार अपना वोट डाला। उनकी पट्टी बंधी उंगली पर अब नीली स्याही का निशान था—जो इस बात का प्रतीक था कि उन्होंने हार नहीं मानी।
अक्षया ने मीडिया से कहा, मैंने यह लड़ाई सिर्फ अपने लिए नहीं लड़ी। मैं नहीं चाहती कि भविष्य में किसी और मतदाता को ऐसा अपमान झेलना पड़े।
अधिकारियों के रवैये पर सवाल
इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई। सीपीआई नेता वी.एस. सुनील कुमार ने प्रिसाइडिंग ऑफिसर के व्यवहार को अहंकारी बताया। आरोप है कि उच्च अधिकारियों के कहने के बावजूद प्रिसाइडिंग ऑफिसर लिखित आदेश के बिना मानने को तैयार नहीं थीं। फिलहाल, यह घटना पूरे राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है।
In Thrissur, a woman named Akshaya was initially stopped from voting because her left index finger was bandaged due to an injury. The Presiding Officer refused to let her vote since the election ink could not be applied to that finger. However, the Chief Electoral Officer… pic.twitter.com/nQdgRwtF9g
— Chief Electoral Officer Kerala (@Ceokerala) April 9, 2026
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