ईरान-अमेरिका शांति वार्ता पर ग्रहण: इस्लामाबाद की सारी तैयारी धरी की धरी, क्या टल गया समाधान?
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इस्लामाबाद में अनिश्चितता का माहौल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद इस वक्त एक अजीब कशमकश में है। ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर अब भारी कूटनीतिक शर्मिंदगी के मुहाने पर खड़े हैं, क्योंकि जिन तैयारियों को लेकर दिन-रात मेहनत की गई, वे अब बेकार जाती दिख रही हैं।

जोर-शोर से हुई थी तैयारी 11 अप्रैल को होने वाली इस बैठक के लिए इस्लामाबाद को किले में तब्दील कर दिया गया था। सेरेना होटल के आसपास के इलाके सील थे, स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए थे और पूरे शहर में सुरक्षा बलों का कड़ा पहरा था। पाकिस्तानी मीडिया और सरकार ने इसे अपनी बड़ी जीत बताते हुए बढ़-चढ़कर प्रचार भी किया था, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।

ईरान का दो टूक इनकार बात तब बिगड़ी जब ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी तस्नीम ने सफाई दी कि ईरान का कोई भी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद के लिए रवाना ही नहीं हुआ है। ईरान ने साफ कर दिया कि लेबनान पर इजरायल के लगातार हमलों के बीच बातचीत का कोई मतलब नहीं है। ईरानी राजदूत का वह सोशल मीडिया पोस्ट भी डिलीट हो गया, जिसमें कथित तौर पर 10 सदस्यीय दल के आने की बात कही गई थी।

क्यों टूटा बातचीत का भरोसा? ईरान का आरोप है कि इजरायल ने युद्धविराम के बावजूद लेबनान पर हमले जारी रखे हैं, जो सीधे तौर पर समझौते का उल्लंघन है। ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक लेबनान में शांति नहीं होती, तब तक ऐसी किसी भी वार्ता में शामिल होना ईरान के लिए संभव नहीं है।

अमेरिका और ईरान के बीच का फंसा पेंच इस बातचीत के विफल होने के पीछे सिर्फ लेबनान ही नहीं, बल्कि ईरान की 10 सूत्रीय मांगें और उसका न्यूक्लियर प्रोग्राम भी है। ईरान यूरेनियम संवर्धन और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने प्रभुत्व को लेकर अडिग है, जिसे अमेरिका किसी भी हाल में मानने को तैयार नहीं है। अमेरिका के लिए ईरान के ये प्रस्ताव अस्वीकार्य हैं।

पाकिस्तान की साख दांव पर तमाम कयासों के बीच पाकिस्तान अभी भी उम्मीद लगाए बैठा है। विदेश मंत्री इशाक डार लगातार कह रहे हैं कि प्रतिनिधियों के लिए वीजा ऑन अराइवल की सुविधा तैयार है। पाकिस्तान की यह छटपटाहट बताती है कि इस वार्ता की विफलता देश की कूटनीतिक साख पर कितना गहरा असर डालने वाली है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या यह शांति वार्ता सिरे चढ़ेगी या फिर भू-राजनीतिक तनाव इसे हमेशा के लिए दफन कर देगा।

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