बंगाल चुनाव: मछली बनी सियासी हथियार , ममता और मोदी आमने-सामने
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पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में इस बार मछली एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है। राज्य की संस्कृति और खान-पान को केंद्र में रखकर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

पीएम मोदी का हमला: बंगाल में मछली उत्पादन का गिरता स्तर हल्दिया में आयोजित एक जनसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीएमसी सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी के कुशासन के चलते बंगाल में मछली का उत्पादन घटा है। पीएम ने बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भाजपा के प्रयासों से मछली उत्पादन दोगुना हुआ है, जबकि बंगाल आज भी अपनी जरूरतों के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर है।

टीएमसी का पलटवार: भाजपा राज्यों में शाकाहार थोपने का आरोप प्रधानमंत्री के दावों को खारिज करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखा पलटवार किया। उत्तर 24 परगना की रैली में ममता ने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में लोगों को मछली, मांस और अंडे खाने से रोका जा रहा है। उन्होंने कहा, आप हमें मछली खाने की नसीहत दे रहे हैं, लेकिन भाजपा शासित राज्यों में तो मांसाहारी भोजन की दुकानें बंद कराई जा रही हैं।

मछली पर दांव और राजनीतिक संदेश ममता बनर्जी पहले भी कई मंचों से यह दावा कर चुकी हैं कि भाजपा सत्ता में आई तो बंगालियों के खान-पान की आदतों पर पाबंदी लगा देगी। उनका आरोप है कि भाजपा समर्थित लोग लोगों को उनकी पसंद का भोजन नहीं करने देंगे।

वहीं, टीएमसी के इन आरोपों की काट निकालने के लिए भाजपा ने भी अपनी रणनीति बदली है। प्रचार के दौरान भाजपा उम्मीदवार हाथ में मछली लेकर जनता के बीच जा रहे हैं, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि पार्टी बंगाली संस्कृति और मछली प्रेम के खिलाफ नहीं है।

आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति पीएम मोदी ने अपनी रैली में बंगाल को मछली के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की गारंटी दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मछुआरों के लिए समर्पित मंत्रालय बनाया और भारी बजट आवंटित किया है। दूसरी तरफ, ममता बनर्जी ने इसे प्रधानमंत्री को गुमराह करने की कोशिश करार दिया। उन्होंने कहा कि पीएम वही बोल रहे हैं जो उन्हें गलत सलाह देने वाले लोग कान में फुसफुसा रहे हैं।

फिलहाल, बंगाल की सियासत में मछली का मुद्दा विकास और सांस्कृतिक अधिकारों के बीच उलझ गया है। देखना यह है कि बंगाली मतदाताओं के लिए यह मुद्दा कितना प्रभावी साबित होता है।

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