चांद का चक्कर लगाकर लौट रहे आर्टेमिस-2 मिशन के चार एस्ट्रोनॉट्स इन दिनों चर्चा में हैं। लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अंतरिक्ष यान में 10 दिन बिताने वाले ये यात्री अपना मानव अपशिष्ट (ह्यूमन वेस्ट) कहां ठिकाने लगाते हैं? नासा ने हाल ही में जारी एक वीडियो में इसका पूरा सच दिखाया है।
स्पेस टॉयलेट का यूनिवर्सल सिस्टम ओरियन अंतरिक्ष यान में यूनिवर्सल वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम लगा है। यह पृथ्वी के टॉयलेट जैसा बिल्कुल नहीं है। मिशन के दौरान टॉयलेट में कुछ तकनीकी खराबी भी आई थी, जिसे एस्ट्रोनॉट क्रिस्टीना ने ठीक किया। उन्हें अब स्पेस प्लंबर के नाम से भी जाना जा रहा है।
यूरिन का क्या होता है? नासा की ओर से जारी वीडियो में देखा जा सकता है कि लिक्विड वेस्ट (यूरिन) को यान के बाहर अंतरिक्ष में फेंक दिया जाता है। हैरान करने वाली बात यह है कि स्पेस में निकलते ही यूरिन तरल नहीं रहता, बल्कि तुरंत छोटे-छोटे बर्फ के क्रिस्टल में बदल जाता है। इसे यान में इसलिए नहीं रोका जाता ताकि वजन कम रहे।
सॉलिड वेस्ट का क्या होता है? ठोस अपशिष्ट (सॉलिड वेस्ट) को यूरिन की तरह बाहर नहीं फेंका जाता। ओरियन यान में एक खास सिस्टम लगा है जो मल को कंप्रेस करके कनस्तर में कैद कर देता है। इसे अंतरिक्ष में नहीं छोड़ा जाता, बल्कि सुरक्षित तरीके से यान के अंदर ही रखा जाता है और पृथ्वी पर वापस लाया जाता है।
ISS से क्यों अलग है यह सिस्टम? सवाल उठता है कि सब कुछ रिसाइकिल क्यों नहीं होता? दरअसल, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में यूरिन को साफ करके पीने के पानी में बदलने का एडवांस सिस्टम होता है। लेकिन आर्टेमिस-2 एक छोटी अवधि का मिशन है, इसलिए ओरियन कैप्सूल में भारी-भरकम रीसाइक्लिंग मशीन नहीं लगाई गई है।
क्यों आई थी टॉयलेट में दिक्कत? मिशन की शुरुआत में टॉयलेट की वेंट लाइन पूरी तरह से जाम हो गई थी। इसका कारण जमे हुए यूरिन के क्रिस्टल थे। इसे ठीक करने के लिए क्रू मेंबर्स को अंतरिक्ष यान की दिशा सूरज की तरफ मोड़नी पड़ी, ताकि गर्मी से वह पाइप पिघल सके और रास्ता साफ हो सके। यह मिशन इंजीनियरिंग और मानव सहनशक्ति का बेहतरीन उदाहरण है।
The space toilet is one of the most essential pieces of equipment on board. The crew has had to troubleshoot a few issues to use the Universal Waste Management System. So what exactly is the issue? Find out in this explainer video. pic.twitter.com/cfvgyGyEUD
— NASA (@NASA) April 10, 2026
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