पाकिस्तान की मध्यस्थता पर इजरायल का कड़ा रुख, राजदूत बोले- हमें भरोसा नहीं
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भारत में इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रही युद्धविराम वार्ता में पाकिस्तान की भूमिका पर तीखी टिप्पणी की है। अजार ने साफ तौर पर कहा है कि इजरायल, पाकिस्तान को एक भरोसेमंद देश के रूप में नहीं देखता है।

पाकिस्तान पर क्यों नहीं है भरोसा? इजरायली राजदूत ने एक साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तान की विश्वसनीयता संदिग्ध है। उन्होंने कहा, हम पाकिस्तान को एक विश्वसनीय खिलाड़ी के रूप में नहीं देखते हैं। अजार ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने किन कारणों से पाकिस्तान को मध्यस्थ के तौर पर चुना है, यह उनका अपना निर्णय हो सकता है, लेकिन इजरायल इसे गंभीरता से नहीं लेता।

तुलना: कतर और तुर्की जैसे देश अजार ने याद दिलाया कि अमेरिका अतीत में कतर और तुर्की जैसे देशों के साथ भी काम कर चुका है, जो हमास के साथ समझौतों में शामिल रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि इजरायल के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि वह अपने अंतिम लक्ष्यों को पाने के लिए अमेरिका के साथ तालमेल बनाए रखे।

जेडी वेंस का दौरा और इजरायल की चिंताएं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस जल्द ही पाकिस्तान का दौरा करने वाले हैं। इस यात्रा का उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच एक दीर्घकालिक समझौते को सुरक्षित करना है। इजरायल का मानना है कि इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं को पूरी तरह खत्म करना है।

कूटनीति बनाम सैन्य कार्रवाई इजरायली राजदूत के अनुसार, देश अब सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीति पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहा है। उन्होंने कहा कि इजरायल का लक्ष्य ईरानी शासन को कमजोर करना था, जिसमें वह सफल रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरानी शासन कोई और विकल्प नहीं छोड़ता है, तो इजरायल फिर से सैन्य ताकत का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेगा।

नाजुक स्थिति: लेबनान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज शांति प्रक्रिया के बीच तनाव कम नहीं हुआ है। इजरायल द्वारा लेबनान पर किए गए भारी हमलों ने स्थिति को नाजुक बना दिया है। ईरान का आरोप है कि ये हमले युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन हैं, जिससे तनाव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तक फैल सकता है।

परमाणु कार्यक्रम पर विरोधाभासी दावे अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी तनातनी जारी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन रोकने पर सहमत है, जबकि तेहरान ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने कहा कि इजरायल की सैन्य कार्रवाई के कारण यह समझौता पहले ही खतरे में है।

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