कबीर दास ने कहा था कि तिनके की भी निंदा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि वही तिनका जब आंख में गिरता है, तो भारी पीड़ा देता है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से छेड़छाड़ कर बिल्कुल वैसा ही तिनका अपनी आंखों में समा लिया है। शांति का नोबेल न मिलने की कसक और वेनेजुएला में मिली आसान सफलता ने ट्रंप को ईरान जैसे मजबूत किले को भेदने का दुस्साहस करने पर मजबूर कर दिया।
40 सालों से ईरान के खिलाफ मौके की तलाश में बैठे इजरायल ने ट्रंप को विश्वास दिलाया कि ईरान कुछ ही हफ्तों में परमाणु बम बना लेगा। लोकतंत्र बहाली के नाम पर ट्रंप ने ईरान में सत्ता परिवर्तन (रिजीम चेंज) की कोशिश शुरू की। लेकिन 10 दिनों के भीतर ही साफ हो गया कि यह मुहिम उनके हाथ से निकल चुकी है। अयातुल्ला खामेनेई और अन्य नेताओं के खिलाफ उग्र होने वाले ईरानी युवा भी इस बार ट्रंप की चाल को समझ चुके थे।
ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नस दबाकर ट्रंप को दुनिया भर में विलेन बना दिया। तेल की कीमतें 140 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं और वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा गई। अमेरिका का एयर डिफेंस सिस्टम जब ईरान के सामने बौना साबित हुआ, तो ट्रंप ने खींच उतारने के लिए नाटो देशों पर बिल फाड़ना शुरू किया। नतीजतन, स्पेन, इटली, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों ने भी ट्रंप की दादागिरी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
ईरान ने सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और यूएई में स्थित अमेरिकी अड्डों और तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाकर तबाही मचा दी। कतर के रास लफान सिटी में हुए नुकसान की भरपाई में पांच साल लग सकते हैं। कुल 150 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान झेलने के बाद अरब देशों का अमेरिका से मोहभंग होना तय है। वहीं, पेंटागन को 200 अरब डॉलर का अतिरिक्त बजट मांगना पड़ा, जो ट्रंप की रणनीतिक असफलता दिखाने के लिए काफी है।
जंग के मैदान में दुर्गति देख ट्रंप अब गाली-गलौज की भाषा पर उतर आए हैं। उनके इस व्यवहार को देखकर सोशल मीडिया पर उन्हें Trump Again Chickens Out (TACO) कहा जा रहा है। तुर्किए में ईरानी दूतावास का यह ट्वीट कि किसी सनकी की चेतावनी उस सभ्यता को नहीं मिटा सकती जिसे समय भी नहीं मिटा सका, ट्रंप के अहंकार पर करारा तमाचा था।
अंततः ट्रंप को ईरान की शर्तों पर सीजफायर के लिए झुकना पड़ा। जीत के दावे के साथ पोडियम पर चढ़े उनके रक्षा सचिव भी इस हार को छुपा नहीं सके। अब स्थिति यह है कि ट्रंप न सिर्फ अपनी पार्टी और समर्थकों के निशाने पर हैं, बल्कि उन्हें अपने ही सलाहकारों को गलत सलाह के नाम पर बर्खास्त करने का नया ड्राफ्ट तैयार करना पड़ रहा है।
ट्रंप की स्थिति आज ग्रामीण कहावत जातो गंवाए, भातो न खाए जैसी हो गई है। यानी न तो उनका उद्देश्य (रिजीम चेंज) पूरा हुआ और न ही दुनिया में उनकी साख बची। अब ट्रंप एक ड्रॉफ्ट मोड में हैं, जहां उन्हें इस शर्मनाक हार से उबरने और भविष्य की गलतियों पर पर्दा डालने में लंबा समय लगेगा।
Alexander burned it. The Mongols ravaged it. History tested it.#Iran is still here. A psychopath’s threats won’t end what time couldn’t. pic.twitter.com/Okp1dJSByo
— Iran Embassy in Türkiye (@Iran_in_Turkiye) April 7, 2026
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