सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट रूम की इस सुनवाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें शीर्ष अदालत द्वारा लगाई गई फटकार के बाद अधिकारी निरुत्तर नजर आ रहे हैं।
मामला वर्ष 2025 का है, जब सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के सेंट्रल मार्केट में अवैध निर्माण को ध्वस्त करने का स्पष्ट आदेश दिया था। आवास विकास परिषद ने कार्रवाई करते हुए एक बड़े कॉम्प्लेक्स को गिरा भी दिया था।
हालांकि, इसके बाद स्थानीय स्तर पर व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और बाजार बंद कर दिया। राजनीतिक दबाव के चलते तत्कालीन मेरठ कमिश्नर हृषिकेश भास्कर यशोद ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगा दी और व्यापारियों को वहां अस्थायी तौर पर दुकान लगाने की अनुमति दे दी। यही आदेश उनके लिए मुसीबत का सबब बन गया।
जब यह मामला दोबारा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो बेंच ने सरकारी आदेश के उल्लंघन पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने अधिकारी को कानून, संवैधानिक कर्तव्यों और लोकतंत्र का पाठ पढ़ाया। न्यायाधीशों की तीखी टिप्पणियों के सामने अधिकारी की एक न चली और वे पूरी तरह से असहज और मौन नजर आए।
डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद 2006 बैच के यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 28 अगस्त 1979 को हुआ था। वे केवल एक प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि एक क्वालिफाइड एमबीबीएस डॉक्टर भी हैं। उन्होंने कोल्हापुर की शिवाजी यूनिवर्सिटी से मेडिकल की पढ़ाई पूरी की है।
अपने करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। इनमें डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM), मुख्य सचिव के चीफ स्टाफ ऑफिसर, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, स्पेशल सेक्रेटरी और डिविजनल कमिश्नर जैसे पद शामिल हैं। उन्हें हिंदी, अंग्रेजी और मराठी भाषाओं का अच्छा ज्ञान है।
अक्टूबर 2025 में, विवादों के बीच मेरठ कमिश्नर पद से उन्हें हटाकर रिलीफ कमिश्नर के पद पर स्थानांतरित कर दिया गया था। अपनी साइंटिफिक ट्रेनिंग और प्रशासनिक अनुभव के बावजूद, मेरठ मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने उनके करियर के इस अध्याय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
*Supreme Court pulls up senior UP IAS officer, leaves him speechless! Must watch.
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) April 8, 2026
In 2025, the Supreme Court ordered the demolition of Meerut’s Central Market - a prominent BJP stronghold. But the then Commissioner, Rishikesh Bhaskar Yashod, under pressure from BJP leaders,… pic.twitter.com/80hfUoWEuw
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