इज़राइल का लेबनान पर भीषण मिसाइल हमला, जवाब में ईरान ने बंद किया दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग
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मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीदें सिर्फ 24 घंटे में ही दम तोड़ती नजर आ रही हैं। अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के सीज़फायर समझौते के अगले ही दिन इज़राइल ने लेबनान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है, जिसके बाद ईरान ने भी वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला देने वाला कदम उठा लिया है।

10 मिनट में 100 मिसाइलें: लेबनान में तबाही

इज़राइल ने लेबनान के अंदर हिज़्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बनाकर महज 10 मिनट के भीतर 100 से अधिक मिसाइलें दागीं। इस भीषण हमले में अब तक 100 से ज्यादा लोगों के मारे जाने और सैकड़ों के घायल होने की खबर है। इज़राइली सेना का दावा है कि यह ऑपरेशन उनकी सुरक्षा के लिए अपरिहार्य था। इस हमले ने लेबनान की राजधानी और अन्य क्षेत्रों में भारी अफरा-तफरी पैदा कर दी है।

सीज़फायर बना धोखा ?

अमेरिका की मध्यस्थता में ईरान के साथ दो हफ्ते का संघर्ष-विराम लागू हुआ था, जिससे विश्व को राहत की उम्मीद थी। हालांकि, इज़राइल ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह सीज़फायर केवल ईरान पर लागू है, लेबनान या हिज़्बुल्लाह पर नहीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी स्पष्ट किया है कि लेबनान इस डील का हिस्सा ही नहीं था, जिसके कारण इज़राइल वहां सैन्य कार्रवाई जारी रखने के लिए स्वतंत्र है।

ईरान का बड़ा पलटवार: होर्मुज़ जलडमरूमध्य बंद

इज़राइल के हमलों के जवाब में ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को पूरी तरह बंद कर दिया है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति की जीवन रेखा माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस रास्ते के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया की महंगाई पर पड़ेगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट

ईरान के इस कदम को अमेरिका ने पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है और जल्द से जल्द मार्ग खोलने की चेतावनी दी है। दूसरी तरफ, बेंजामिन नेतन्याहू अपनी नीति पर अडिग हैं; वे एक ओर अमेरिका के साथ समन्वय की बात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर हिज़्बुल्लाह के खात्मे तक युद्ध जारी रखने का संकल्प दोहरा रहे हैं।

फिलहाल, मध्य पूर्व के हालात एक खतरनाक मोड़ पर खड़े हैं। सीज़फायर के बावजूद हिंसा का बढ़ना और ईरान द्वारा तेल सप्लाई रूट को ब्लॉक करना, इस क्षेत्र को एक और बड़े युद्ध की ओर धकेल सकता है। दुनिया अब इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीतिक बातचीत के जरिए ईरान को रास्ता खोलने के लिए मनाया जा सकेगा या यह गतिरोध वैश्विक ऊर्जा संकट में तब्दील हो जाएगा।

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