वाशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए दो हफ्तों के सीजफायर पर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान द्वारा पेश किए गए 10-पॉइंट प्रस्ताव को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सिरे से खारिज कर दिया है और इसे कूड़ेदान में फेंक दिया है।
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन करते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान के किसी भी शुरुआती प्रस्ताव को मंजूर नहीं किया था। उन्होंने कहा, ईरानियों का 10-पॉइंट वाला प्रस्ताव गैर-गंभीर था। राष्ट्रपति और उनकी टीम ने इसे कूड़ेदान में डाल दिया था। लेविट ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान की विश लिस्ट को समझौता मान लेना एक हास्यास्पद सोच है।
ईरान ने जो प्रस्ताव रखा था, उसमें कई ऐसी शर्तें थीं जिन्हें अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाते हुए नकार दिया। इन शर्तों में ईरान पर हमलों को रोकना, होर्मुज स्ट्रेट पर ईरानी नियंत्रण, यूरेनियम एनरिचमेंट जारी रखना और सभी अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना शामिल था। साथ ही, ईरान ने क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और मुआवजे की भी मांग की थी।
व्हाइट हाउस ने दोहराया है कि राष्ट्रपति ट्रंप की रेड लाइन में कोई बदलाव नहीं आया है। अमेरिका की सबसे बड़ी शर्त ईरान के भीतर यूरेनियम एनरिचमेंट को पूरी तरह बंद करना है। लेविट ने जानकारी दी कि इसके बाद ईरान द्वारा एक संशोधित योजना पेश की गई है, जिस पर अमेरिका अपने 15-पॉइंट प्रस्ताव के साथ बातचीत करने की संभावना तलाश रहा है।
तनाव के बीच सीजफायर के भविष्य पर संशय गहरा गया है। एक तरफ लेबनान पर इजरायली हमले नहीं रुक रहे हैं, जिसे लेकर ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि ये हमले जारी रहे, तो वह सीजफायर से पीछे हट सकता है। साथ ही, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के फैसले को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीजफायर को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। डोनाल्ड ट्रंप पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि उनके और ईरान के बीच हुए इस समझौते में लेबनान शामिल नहीं है, क्योंकि वहां हिज्बुल्लाह की गतिविधियां जारी हैं। अब 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत तय करेगी कि यह सीजफायर टिक पाएगा या युद्ध की आग फिर से भड़क उठेगी।
#WATCH | White House Press Secretary Karoline Leavitt says, ...Iran has agreed to open the Strait of Hormuz, and as the president said, we have received a proposal from the Iranians that has been determined to be a workable basis on which to negotiate...The Iranians originally… pic.twitter.com/kBLBqd5Hb4
— ANI (@ANI) April 8, 2026
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