क्या अमेरिकी सैनिक करेंगे बगावत? ट्रंप की धमकियों ने सेना को दोराहे पर खड़ा किया
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ईरान के खिलाफ जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने एक बड़ा संवैधानिक और नैतिक संकट पैदा कर दिया है। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोला, तो उसके पुलों और पावर प्लांटों को तबाह कर दिया जाएगा।

युद्ध अपराध की श्रेणी में ट्रंप के आदेश ट्रंप की ये धमकियां अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत युद्ध अपराध (War Crime) मानी जा रही हैं। जानकारों का कहना है कि किसी देश के नागरिक बुनियादी ढांचे (Civilian Infrastructure) को निशाना बनाना सैन्य नियमों के खिलाफ है। पूर्व न्यायाधीश मार्गरेट डोनोवन और राहेल वैनलैंडिंगहैम के अनुसार, ऐसे आदेश अमेरिकी सैनिकों को उस कानूनी और नैतिक प्रशिक्षण के विपरीत स्थिति में धकेलते हैं, जो उन्हें सालों से दिया गया है।

अमेरिकी सैनिकों के सामने अब दो ही रास्ते ट्रंप के इन तीखे तेवरों के बाद अब अमेरिकी सैनिकों के पास केवल दो विकल्प बचे हैं:

  1. राष्ट्रपति के आदेश का पालन करते हुए प्रत्यक्ष रूप से युद्ध अपराध को अंजाम देना।
  2. अवैध आदेश मानकर बगावत करना और निर्देशों को मानने से इनकार करना।

बगावत का ऐतिहासिक उदाहरण इतिहास गवाह है कि सैनिकों ने पहले भी अवैध आदेशों को ठुकराया है। 1968 के वियतनाम युद्ध के दौरान माई लाई नरसंहार में कई सैनिकों ने निर्दोषों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने बाद में स्पष्ट किया था कि किसी भी सिपाही का यह कर्तव्य है कि वह स्पष्ट रूप से गैर-कानूनी आदेशों को मानने से मना करे। हालांकि, ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी है कि आदेश न मानना देशद्रोह है, जिसके लिए मौत की सजा भी हो सकती है।

फैसले की दुविधा राजनीतिक विज्ञान की प्रोफेसर चार्ली कारपेंटर के मुताबिक, सैनिकों के लिए चुनौती यह तय करना है कि आदेश अवैध है या नहीं। उन्हें आज्ञापालन का कड़ा प्रशिक्षण दिया जाता है। यदि एक सैनिक गलत अनुमान लगाता है और आदेश मानने से इनकार करता है, तो उसे कोर्ट मार्शल का सामना करना पड़ सकता है।

ट्रंप की धमकियां लगातार जारी सोमवार को व्हाइट हाउस में ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को धमकाते हुए कहा कि उनकी सेना महज 4 घंटे में ईरान को तबाह कर सकती है। एक तरफ जहां राष्ट्रपति के दावे और धमकियां तेज हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पेंटागन और जमीनी स्तर पर तैनात सैन्य अधिकारी एक ऐसे मुहाने पर खड़े हैं, जहां से वापसी का रास्ता बेहद संकीर्ण नजर आ रहा है।

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