तेहरान/वाशिंगटन: 3 अप्रैल 2026 को ईरान में अमेरिकी फाइटर जेट F-15E के क्रैश होने के बाद हड़कंप मच गया। जेट में दो लोग सवार थे। अमेरिका ने एक पायलट को तो सुरक्षित निकाल लिया, लेकिन दूसरे ऑफिसर की स्थिति पर लंबे समय तक चुप्पी साधे रखी। अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस चुप्पी के पीछे का राज खोला है और इसके लिए एक मीडिया लीकर को जिम्मेदार ठहराया है।
ट्रंप ने प्रेस ब्रीफिंग में बेहद सख्त लहजे में कहा कि वाइट हाउस की चुप्पी एक सोची-समझी रणनीति थी। राष्ट्रपति के अनुसार, ईरान को इस बात की भनक तक नहीं थी कि क्रैश साइट पर कोई दूसरा शख्स भी मौजूद है। लेकिन एक मीडिया रिपोर्ट के लीक होते ही सब बदल गया। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि पत्रकार ने अपने सोर्स का नाम उजागर नहीं किया, तो उन्हें जेल जाना होगा। उन्होंने कहा, यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है, वह (लीकर) एक बीमार व्यक्ति है।
ट्रंप की धमकी के बाद इजरायल के मशहूर पत्रकार अमित सेगल का नाम चर्चा में आ गया। उन पर आरोप है कि उन्होंने ही सबसे पहले लापता दूसरे एयरमैन की जानकारी सार्वजनिक की थी। हालांकि, सेगल ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनसे पहले कई अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया हाउस यह खबर ब्रेक कर चुके थे। सेगल का तर्क है कि इजरायली पत्रकार ने खतरे में डाली जान जैसी हेडलाइन उन्हें निशाना बनाने के लिए गढ़ी जा रही है।
43 वर्षीय अमित सेगल इजरायल के सबसे प्रभावशाली पत्रकारों में से हैं। चैनल 12 के पॉलिटिकल कमेंटेटर सेगल की पहुंच सीधे पीएम बेंजामिन नेतन्याहू तक मानी जाती है। 2022 में उन्हें नेतन्याहू ने कैबिनेट मंत्री बनने का ऑफर भी दिया था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था। उनके पिता हगाई सेगल भी पत्रकारिता की दुनिया में एक बड़ा नाम रहे हैं।
ट्रंप प्रशासन के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और सीआईए चीफ जॉन रैटक्लिफ का दावा है कि रिपोर्टिंग के बाद ईरान की सेना (IRGC) और स्थानीय कबीलों ने दूसरे ऑफिसर की तलाश तेज कर दी थी। इससे रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद खतरनाक हो गया।
दूसरी ओर, कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि F-15E एक टू-सीटर एयरक्राफ्ट है। ईरान को यह बखूबी पता है कि ऐसे जेट में कितने पायलट होते हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या ट्रंप प्रशासन अपनी रेस्क्यू रणनीति की विफलता को छिपाने के लिए मीडिया को बलि का बकरा बना रहा है?
अमेरिका में फर्स्ट अमेंडमेंट पत्रकारों को अपने सोर्स की रक्षा करने का अधिकार देता है। हालांकि, राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में कानून अक्सर सरकार के पक्ष में झुक जाता है। इतिहास गवाह है कि कई मामलों में सोर्स न बताने पर पत्रकारों को जेल की हवा खानी पड़ी है। फिलहाल, दोनों पायलट सुरक्षित हैं, लेकिन इस घटना ने अमेरिका और इजरायल के बीच एक नया कूटनीतिक तनाव पैदा कर दिया है। क्या ट्रंप वाकई किसी विदेशी पत्रकार को जेल भेज पाएंगे? पूरी दुनिया की नजरें अब इस कानूनी और कूटनीतिक जंग पर टिकी हैं।
Trump: We have to find that leaker, because that s a sick person. It s national security. And the person that did the story will go to jail if he doesn t say. pic.twitter.com/PVipUEXXO4
— Aaron Rupar (@atrupar) April 6, 2026
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