इज़राइल और अमेरिका के साथ जारी तनावपूर्ण युद्ध के बीच ईरान ने अपने ही नागरिकों पर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। ईरानी सरकार ने 23 वर्षीय एक प्रदर्शनकारी अली फहीम को फांसी दे दी है। महज 8 दिनों के भीतर 10 राजनीतिक कैदियों को मौत की सजा देकर तेहरान ने खौफ का माहौल बना दिया है।
कौन था अली फहीम? फांसी पर चढ़ाए गए 23 वर्षीय अली फहीम पर जनवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान तेहरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बसिज मिलिशिया बेस पर हमले का आरोप था। ईरानी न्यायपालिका ने उसे अमेरिका और इज़रायल का एजेंट करार देते हुए आतंकवादी घोषित किया था। आरोप था कि वह सैन्य ठिकाने से हथियार लूटना चाहता था।
न्याय के नाम पर बर्बरता मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि फहीम और उसके साथियों को बिना किसी निष्पक्ष सुनवाई के सजा दी गई। उन्हें अपने बचाव के लिए कानूनी सहायता तक नहीं मिली और जेल में भीषण यातनाएं दी गईं। फरवरी 2026 में इस मामले में सात लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी, जिनमें दो नाबालिग भी शामिल थे। अब तक इनमें से चार को फांसी दी जा चुकी है, जबकि तीन अन्य अभी भी मौत के साये में जी रहे हैं।
युद्ध को बनाया हथियार विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान सरकार युद्ध की आड़ का फायदा उठा रही है। जब पूरी दुनिया ईरान और इज़राइल के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष पर नजरें गड़ाए हुए है, तब सरकार चुपचाप अपने विरोधियों को रास्ते से हटा रही है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद फांसियों की गति धीमी हुई थी, लेकिन अब ये फिर से तेज हो गई हैं।
खौफ का खेल और भविष्य का खतरा पिछले एक हफ्ते में जिन 10 लोगों को फांसी दी गई, उनमें चार प्रदर्शनकारी और छह अन्य विपक्षी संगठनों के सदस्य शामिल हैं। मानवाधिकार समूहों, जैसे अम्नेस्टी इंटरनेशनल , का कहना है कि सरकार का असली मकसद आम जनता में डर पैदा करना है ताकि भविष्य में सरकार-विरोधी प्रदर्शनों को रोका जा सके।
वर्तमान में, ईरान की जेलों में बंद सैकड़ों अन्य राजनीतिक कैदियों पर भी फांसी की तलवार लटकी हुई है। यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दबाव नहीं बनाया, तो आने वाले दिन ईरान के लिए और अधिक घातक साबित हो सकते हैं।
🚨Iran: 10 Political Executions in 8 days
— Ehsan Eghbal Eslami (@Ehsaneghbale) April 6, 2026
With the execution of January protester Ali Fahim this morning, the regime has now hanged 10 political prisoners and protesters in just over a week:
🗓️Mon (Mar 30): Mohammad Taghavi, Akbar Daneshvarkar
🗓️Tue: Babak Alipour, Pouya Ghobadi… https://t.co/UYmHru92yQ pic.twitter.com/NMQhkTu52e
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